‘हुजूर’ पुराण…. यह पब्लिक है ‘बाबू’ सब जानती है
चेहते की चुप्पी गहरी थीबात एक ‘आजाद’ की. जो कुनबे (कांग्रेस) में आया था पांच साल बाद पूरी होने वाली उम्मीद को लेकर. चुनाव से एक साल पहले से मैदान में जुताई शुरू कर दी थी. कुनबे के मुखिया के कहने पर. खेत और पैदावार तुम्हारी होगी. बीज, खाद डाला, पानी दिया. पैदावार जब हुई…