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हेपेटाइटिस बदल रहा है लिवर सिरोसिस में? पहचानें ये शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय

हेपेटाइटिस बदल रहा है लिवर सिरोसिस में? पहचानें ये शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय
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गिरीश कुमार,
BDC News | bhopalonline.org

हेपेटाइटिस (Hepatitis) और लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis)—ये दो ऐसे शब्द हैं जिन्हें अक्सर लोग एक ही समझ लेते हैं या फिर शुरुआती लक्षणों को मामूली थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह अनदेखी लिवर को उस मोड़ पर लाकर खड़ा कर सकती है जहाँ से वापसी का रास्ता बेहद मुश्किल हो जाता है?

लिवर हमारे शरीर का पावरहाउस है, जो भोजन पचाने से लेकर टॉक्सिन्स (जहरीले पदार्थों) को बाहर निकालने तक के 500 से अधिक काम अकेले करता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि हेपेटाइटिस कैसे धीरे-धीरे सिरोसिस का रूप ले लेता है और आप इससे खुद को कैसे बचा सकते हैं।

हेपेटाइटिस क्या है? (What is Hepatitis?)

सीधे शब्दों में कहें तो हेपेटाइटिस का मतलब है ‘लिवर में सूजन (Inflammation)’। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • वायरल हेपेटाइटिस: यह वायरस (Hepatitis A, B, C, D, E) के कारण होता है। इनमें हेपेटाइटिस B और C सबसे खतरनाक होते हैं क्योंकि ये सालों तक बिना किसी बड़े लक्षण के शरीर में पल सकते हैं।
  • अल्कोहलिक हेपेटाइटिस: अत्यधिक शराब के सेवन से लिवर में सूजन आना।
  • न न-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD): खराब लाइफस्टाइल और मोटापे के कारण लिवर में फैट जमा होना, जो बाद में सूजन का कारण बनता है।

कही यह हेपेटाइटिस, सिरोसिस तो नहीं बन रहा?

जब हेपेटाइटिस (विशेषकर B, C या फैटी लिवर) का समय पर इलाज नहीं होता, तो यह क्रोनिक (लंबे समय तक रहने वाली) बीमारी बन जाता है।

लिवर में लगातार सूजन रहने के कारण वहाँ की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। हमारा लिवर खुद को ठीक करने की कोशिश करता है, जिससे वहाँ ‘स्कार टिश्यू’ (Scar Tissue यानी एक तरह का घाव या सख्त चमड़ी) बनने लगते हैं। इस प्रक्रिया को ‘फाइब्रोसिस’ कहते हैं।

जब यह फाइब्रोसिस पूरे लिवर में फैल जाता है और स्वस्थ लिवर टिश्यू की जगह पूरी तरह सख्त स्कार टिश्यू ले लेते हैं, तो उस अंतिम और गंभीर स्थिति को लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) कहा जाता है। सिरोसिस होने पर लिवर सिकुड़ जाता है, पत्थर की तरह सख्त हो जाता है और काम करना बंद कर देता है।

उन लक्षणों को पहचानें जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं

शुरुआत में हेपेटाइटिस और सिरोसिस के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें गैस, बदहजमी या काम का तनाव समझ लेते हैं:

  1. लगातार थकान और कमजोरी: बिना ज्यादा काम किए भी शरीर में ताकत न महसूस होना।
  2. भूख न लगना और अचानक वजन कम होना: खाने की इच्छा बिल्कुल खत्म हो जाना।
  3. हल्का पीलिया (Jaundice): आंखों और त्वचा का रंग हल्का पीला होना या पेशाब का रंग गहरा होना।
  4. पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन: पसलियों के ठीक नीचे हल्का दर्द या सूजन महसूस होना।

सिरोसिस के गंभीर लक्षण (जब पानी सिर से ऊपर चला जाए):

  • पेट में पानी भरना (Ascites) जिससे पेट मटके जैसा फूल जाता है।
  • पैरों और टखनों में भारी सूजन आना।
  • त्वचा पर मकड़ी के जाले जैसी नसें (Spider Angiomas) दिखना।
  • उल्टी में खून आना या काले रंग का मल आना।
  • याददाश्त कमजोर होना या अचानक मानसिक संतुलन बिगड़ना (Hepatic Encephalopathy)।

बचाव और सतर्कता ही एकमात्र उपाय है

लिवर सिरोसिस को पूरी तरह रिवर्स (ठीक) नहीं किया जा सकता, इसलिए हेपेटाइटिस के चरण में ही इसे रोकना जरूरी है:

  • स्क्रीनिंग करवाएं: यदि आपको अक्सर पेट की समस्या या थकान रहती है, तो डॉक्टर की सलाह पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और हेपेटाइटिस B व C की जांच जरूर कराएं।
  • टीकाकरण (Vaccination): हेपेटाइटिस B से बचने के लिए वैक्सीन जरूर लगवाएं।
  • शराब से तौबा: यदि फैटी लिवर या हेपेटाइटिस के लक्षण हैं, तो अल्कोहल को पूरी तरह अलविदा कह दें।
  • स्वस्थ वजन और खानपान: जंक फूड, अत्यधिक तेल-मसाले से बचें। रोजाना 30 मिनट व्यायाम करें ताकि फैटी लिवर की नौबत न आए।

लिवर एक बेहद सहनशील अंग है। यह 70% डैमेज होने तक भी चुपचाप काम करता रहता है। इसलिए इसकी खामोशी को इसकी सेहत न समझें। हेपेटाइटिस को सही समय पर पहचानें ताकि यह कभी लिवर सिरोसिस जैसी जानलेवा स्थिति में न बदल सके।



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