गिरीश कुमार
BDC News | bhopalonline.org
महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI – मूत्र मार्ग का संक्रमण) एक बेहद आम समस्या है। लेकिन जब यह संक्रमण बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बना रहे, तो मन में यह डर आना स्वाभाविक है कि कहीं इसका सीधा असर किडनी (गुर्दों) पर तो नहीं पड़ रहा?
चिकित्सीय और विशेषज्ञ दृष्टिकोण से समझें तो हर UTI किडनी की बीमारी नहीं होता, लेकिन बार-बार होने वाले या बिगड़े हुए UTI को नजरअंदाज करना किडनी के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
UTI और किडनी का आपस में क्या संबंध है?
हमारा मूत्र मार्ग एक प्रणाली (System) की तरह काम करता है, जिसमें नीचे से ऊपर की तरफ—यूरिनरी ब्लैडर (मूत्रशय) और फिर सबसे ऊपर दोनों किडनियां होती हैं।
- लोअर UTI (साधारण संक्रमण): ज्यादातर संक्रमण केवल मूत्राशय (Bladder) तक सीमित होते हैं। इसे सिस्टाइटिस (Cystitis) कहते हैं। इसमें पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना और पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण होते हैं।
- अपर UTI (किडनी का संक्रमण): यदि लोअर UTI का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो बैक्टीरिया मूत्र नलिकाओं (Ureters) के रास्ते ऊपर की तरफ यात्रा करते हुए किडनी तक पहुंच जाते हैं। इसे पायलोनेफ्राइटिस (Pyelonephritis) यानी किडनी का इन्फेक्शन कहा जाता है।
विशेषज्ञ चेतावनी: यदि संक्रमण किडनी तक पहुंच जाए और उसका तुरंत इलाज न हो, तो यह किडनी के टिश्यूज (उतकों) को हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त कर सकता है, जिसे ‘किडनी स्कारिंग’ कहते हैं। लंबे समय में यह किडनी फेलियर या क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) का कारण बन सकता है।
कैसे पहचानें कि संक्रमण किडनी तक पहुंच गया है?
अगर आपको सामान्य UTI के साथ नीचे दिए गए लक्षण भी महसूस हो रहे हैं, तो इसका मतलब है कि संक्रमण किडनी को प्रभावित कर रहा है:
- पीठ के निचले हिस्से या करवट (Flank pain) में तेज दर्द होना।
- कंपकंपी के साथ तेज बुखार आना और उल्टी या मतली महसूस होना।
- पेशाब का बहुत अधिक बदबूदार, गहरा या उसमें खून (Hematuria) आना।
- अत्यधिक कमजोरी और मानसिक भ्रम (खासकर बुजुर्ग महिलाओं में)।
महिलाओं में ही यह समस्या ज्यादा क्यों बढ़ती है?
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में UTI होने की संभावना कई गुना अधिक होती है। इसके मुख्य कारण हैं:
- शारीरिक बनावट: महिलाओं में मूत्रमार्ग (Urethra) छोटा होता है, जिससे बैक्टीरिया आसानी से मूत्राशय तक पहुंच जाते हैं।
- मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति): उम्र बढ़ने के साथ (विशेषकर 45-50 के बाद) शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी हो जाती है। इससे योनि और मूत्र मार्ग के अच्छे बैक्टीरिया खत्म होने लगते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- पानी की कमी और यूरिन रोकना: काम की व्यस्तता या साफ टॉयलेट न मिलने के कारण यूरिन को देर तक रोकना बैक्टीरिया को पनपने का मौका देता है।
किडनी को सुरक्षित रखने के उपाय और बचाव
अगर आपको साल में 2 से 3 बार से ज्यादा UTI होता है, तो आपको तुरंत यूरोलॉजिस्ट या नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी रोग विशेषज्ञ) से मिलना चाहिए। बचाव के लिए इन बातों का खास ध्यान रखें:
- खूब पानी पीजिए: दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं ताकि बैक्टीरिया यूरिन के रास्ते बाहर निकलते रहें।
- एंटीबायोटिक्स का कोर्स पूरा करें: डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को बीच में न छोड़ें। अधूरा इलाज बैक्टीरिया को और मजबूत (Drug Resistant) बना देता है।
- हाइजीन का ध्यान रखें: वेस्टर्न टॉयलेट इस्तेमाल करते समय स्वच्छता रखें और हमेशा आगे से पीछे की तरफ (Front to Back) सफाई करें।
- नियमित जांच: बार-बार संक्रमण होने पर केवल यूरिन रूटीन टेस्ट न कराएं, बल्कि यूरिन कल्चर टेस्ट (Urine Culture) और किडनी की स्थिति जानने के लिए KFT (Kidney Function Test) व अल्ट्रासाउंड जरूर करवाएं।
निष्कर्ष: बढ़ती उम्र या बिगड़ती जीवनशैली में UTI को केवल ‘गर्मी लग जाना’ या ‘साधारण जलन’ मानकर घरेलू नुस्खों के भरोसे न छोड़ें। सही समय पर लिया गया डॉक्टरी परामर्श आपकी किडनी को हमेशा सुरक्षित रख सकता है।
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