मां ममता का सागर है, मानवता का विश्वविद्यालय
12 मई अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस मां सब की जगह ले सकती है, मां की कोई नहीं ऋषि वाल्मीकि ने लिखा है- जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी- मां और मातृभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊपर है। गुरुओं में मां सर्वोच्च है। पिता से हज़ारों गुना उच्च। निस्संदेह, मां स्वरूप की अहैतुकता ही उसकी श्रेष्ठता है।…