भारत सहित दुनिया को बड़ी राहत, कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से सुनाया फैसला
वाशिंगटन| BDC News|bhopalonline.org
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए ‘ग्लोबल टैरिफ’ को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया है। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से दिए गए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि संविधान के तहत टैक्स या आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।
भारत पर असर: 18% रेसिप्रोकल टैरिफ अब अवैध
भारत के लिए यह खबर किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। ट्रम्प प्रशासन ने भारतीय सामानों पर जो 18% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था, वह अब पूरी तरह अवैध हो गया है। इसके अलावा, दुनिया भर के देशों के लिए तय किया गया 10% बेसलाइन टैरिफ और चीन पर लगा 34% टैरिफ भी इस फैसले के बाद अमान्य हो गया है।
कोर्ट का तर्क: राष्ट्रपति की शक्तियों पर अंकुश
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) की व्याख्या की। ट्रम्प ने इसी कानून का सहारा लेकर व्यापार घाटे को ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ बताया था। हालांकि, कोर्ट ने कहा IEEPA कानून में ‘टैरिफ’ शब्द का कहीं जिक्र नहीं है। राष्ट्रपति बिना संसद की मंजूरी के स्थायी रूप से टैक्स नहीं थोप सकते। ट्रम्प का यह कदम उनकी संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन था।
ट्रम्प की चेतावनी और आर्थिक प्रभाव
राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस फैसले से पहले आगाह किया था कि यदि वे केस हारते हैं, तो “देश बर्बाद हो जाएगा।” लेकिन अदालती फैसले के अब दूरगामी परिणाम होंगे…
- पैसा वापस करना होगा: अमेरिकी सरकार को उन कंपनियों को अरबों डॉलर लौटाने पड़ सकते हैं जिनसे अब तक टैरिफ वसूला गया है।
- सस्ता होगा सामान: आयात शुल्क हटने से अमेरिका में विदेशी सामान सस्ते होंगे, जिससे महंगाई कम हो सकती है।
- निर्यातकों को फायदा: भारत, चीन, यूरोप, कनाडा और मैक्सिको के निर्यातकों को अब अमेरिकी बाजार में ज्यादा पहुंच मिलेगी।
- शेयर बाजार में तेजी: वैश्विक व्यापार में स्थिरता आने की उम्मीद से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बन सकता है।
कौन से टैरिफ अभी भी लागू रहेंगे?
ध्यान रहे कि कोर्ट ने सभी टैरिफ खत्म नहीं किए हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए टैरिफ अलग कानूनों (जैसे सेक्शन 232) के तहत आते हैं, इसलिए वे फिलहाल प्रभावी रहेंगे। रद्द किए गए टैरिफ मुख्य रूप से ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ और उन 25% शुल्कों से संबंधित हैं जो फेंटेनाइल तस्करी रोकने के नाम पर कनाडा, चीन और मैक्सिको पर लगाए गए थे।
12 राज्यों और छोटे कारोबारियों की जीत
ट्रम्प की इन नीतियों के खिलाफ न्यूयॉर्क, कनेक्टिकट, इलिनॉय और ओरेगन जैसे 12 अमेरिकी राज्यों ने मोर्चा खोल रखा था। छोटे कारोबारियों का तर्क था कि इन शुल्कों की वजह से कच्चे माल की लागत बढ़ गई है, जिससे उनका धंधा चौपट हो रहा है।
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