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भारत ने किया परमाणु सक्षम ‘अग्नि-4’ मिसाइल का सफल परीक्षण, 4000 किमी है मारक क्षमता

भारत ने किया परमाणु सक्षम ‘अग्नि-4’ मिसाइल का सफल परीक्षण, 4000 किमी है मारक क्षमता
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नई दिल्ली। BDC NEDS| bhopalonline.org

भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (Integrated Test Range) से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया है। रणनीतिक बल कमान (Strategic Forces Command) की निगरानी में संपन्न हुए इस परीक्षण के दौरान मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया। रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह परीक्षण भारत की सामरिक रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करता है।

परमाणु और पारंपरिक हथियारों से लैस है अग्नि-4

अग्नि-4 एक अत्याधुनिक, दो चरणों वाली और ठोस ईंधन से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 4,000 किलोमीटर तक आंकी गई है। यह मिसाइल न केवल परमाणु हथियारों को ले जाने में पूरी तरह सक्षम है, बल्कि यह पारंपरिक हथियारों का भी प्रभावी उपयोग कर सकती है। भारत की इस बढ़ती सैन्य और रणनीतिक ताकत को देखते हुए पड़ोसी देशों यानी चीन और पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ना तय माना जा रहा है।

साल 2007 में शुरू हुआ था इस उन्नत मिसाइल का सफर

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने वर्ष 2007 में 5,000 किलोमीटर कैटेगरी की मिसाइल परियोजना पर कार्य आरंभ किया था। इसके पश्चात, साल 2011 में हैदराबाद स्थित DRDO की एडवांस्ड मिसाइल लैब द्वारा विकसित इस उन्नत संस्करण को ‘अग्नि-4’ नाम दिया गया। अग्नि-2 प्राइम की तुलना में इस मिसाइल में कई तकनीकी उन्नयन किए गए हैं। इसमें अधिक शक्तिशाली मोटर, आधुनिक गाइडेंस सिस्टम और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को शामिल किया गया है, जो इसे बेहद सटीक और घातक बनाते हैं।

अग्नि-4 मिसाइल की मुख्य विशेषताएं और तकनीकी क्षमता

अग्नि-4 मिसाइल अपनी उच्च तकनीक और सटीक निशाने के लिए दुनिया भर में पहचानी जाती है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • आकार और वजन: इस मिसाइल की कुल लंबाई लगभग 20 मीटर है और इसका कुल वजन लगभग 17,000 किलोग्राम है।
  • मारक क्षमता और पेलोड: यह मिसाइल 4,000 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है और अपने साथ 1,000 किलोग्राम तक का पेलोड (विस्फोटक सामग्री) ले जा सकती है।
  • अत्याधुनिक नेविगेशन: इसमें रिंग लेजर जाइरोस्कोप आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और फ्लेक्ससील थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 4,000 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करने के बाद भी इसका निशाना 100 मीटर से भी कम के दायरे में बेहद सटीक रहता है।


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