एक नगर है…. वक्त होत बलवान
अजय तिवारीकल की ही तो बात है… जब खामोशी से वो जिंदगी गुजर बसर कर रहा था। सब कुछ बिना शोर शराबे के चल रहा था। वक्त बदला- चाहने वाले बढ़े, मित्र मंडल भी तैयार हो गया। शहर सज गया, शहनाइयां बज उठीं। उससे मिलने का रूख न करने वाले बेहद खास हो गया। वैसे…