वॉशिंगटन/नई दिल्ली।
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वैश्विक राजनीति के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में करीब 40 मिनट तक टेलीफोन पर उच्च स्तरीय वार्ता हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) में अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम (Ceasefire) ने दुनिया को बड़ी राहत दी है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सीजफायर के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक चर्चा थी, जिसने वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को एक बार फिर रेखांकित किया है।
पश्चिम एशिया में शांति और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात और क्षेत्र में स्थायी शांति की बहाली रहा। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक स्थिरता के लिए तनाव कम करना अनिवार्य है। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला और सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। गौरतलब है कि दुनिया का एक-तिहाई कच्चे तेल का व्यापार इसी मार्ग से होता है, और इसमें किसी भी प्रकार का अवरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
“भारत के लोग आपको पसंद करते हैं”: व्यक्तिगत केमिस्ट्री और कूटनीति
फोन कॉल के दौरान दोनों नेताओं के बीच की व्यक्तिगत गर्मजोशी भी साफ नजर आई। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से कहा, “भारत के लोग आपको पसंद करते हैं।” इसके जवाब में, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, ट्रंप ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “हम सभी (अमेरिका) आपसे प्यार करते हैं।” यह 20 दिनों के भीतर दोनों नेताओं के बीच दूसरी बड़ी बातचीत थी। इससे पहले 24 मार्च को भी दोनों के बीच मिडिल ईस्ट के हालात को लेकर चर्चा हुई थी। यह निरंतरता दर्शाती है कि व्हाइट हाउस और नई दिल्ली के बीच संवाद का स्तर अब ‘रणनीतिक’ से ऊपर उठकर ‘प्राथमिक’ हो गया है।
रक्षा, अर्थव्यवस्था और भविष्य का सहयोग
सूत्रों के मुताबिक, इस बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा (Defense), कूटनीति और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया गया। 15 फरवरी 2025 को व्हाइट हाउस में हुई उनकी ऐतिहासिक मुलाकात के बाद से ही दोनों देश कई अहम प्रोजेक्ट्स पर साथ काम कर रहे हैं। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका के रिश्ते अपने सबसे मजबूत दौर में हैं और भविष्य में यह साझेदारी वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में मील का पत्थर साबित होगी।
वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव
वर्तमान में रूस-यूक्रेन संघर्ष और चीन की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता के बीच, मोदी-ट्रंप की यह जुगलबंदी एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। भारत जहाँ अपनी ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ बनाए हुए है, वहीं अमेरिका उसे अपने सबसे भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में देख रहा है।
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