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8th Pay Commission : SCREA प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिला, रेलवे इंजीनियरों के प्रमोशन और पे-स्केल पर हुई बात

8th Pay Commission :  SCREA प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिला, रेलवे इंजीनियरों के प्रमोशन और पे-स्केल पर हुई बात
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नई दिल्ली / सिकंदराबाद।
BDC News | bhopalonline.org
साउथ सेंट्रल रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन (SCREA) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में रेल इंजीनियरों की लंबे समय से लंबित समस्याओं और उनके हितों से जुड़े कई अहम मुद्दों को प्रमुखता से आयोग के सामने रखा गया।

यह बैठक SCREA के संस्थापक अध्यक्ष ईर. खनन सर, AIREF के महासचिव ईर. बी.पी. दास, AIREF के अध्यक्ष ईर. पन्नू और ईर. बोबिन मोहंती के दूरदर्शी मार्गदर्शन में आयोजित की गई थी।

बैठक में शामिल रहे SCREA के ये प्रमुख पदाधिकारी

8वें वेतन आयोग के अधिकारियों के साथ हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में एसोसिएशन की ओर से निम्नलिखित मुख्य पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और रेल इंजीनियरों का पक्ष रखा:

  • ईर. जे.आर. श्रीनिवासुलु – अध्यक्ष, SCREA
  • ईर. वाई. लोकेश्वर – महासचिव, SCREA
  • ईर. सी. रमेश – वरिष्ठ उपाध्यक्ष, AIREF
  • ईर. डी. पद्मनाभम – कार्यकारी अध्यक्ष
  • ईर. पी.वी. रमना – सलाहकार
  • ईर. श्याम – मंडल अध्यक्ष / वर्कशॉप

इन 3 मुख्य एजेंडा बिंदुओं पर केंद्रित रही चर्चा

प्रतिनिधिमंडल ने रेल इंजीनियरों के साथ हो रहे प्रणालीगत मुद्दों (Systemic Issues) को मजबूती से उठाया और मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगों पर अपना दावा पेश किया:

प्रमोशन में ठहराव (Promotion Stagnation) की समस्या

प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को बताया कि वर्तमान व्यवस्था में रेल इंजीनियरों के लिए समय पर प्रमोशन के अवसरों की भारी कमी है, जिससे उनके करियर में ठहराव आ गया है। इस चर्चा के दौरान वेतन आयोग के अधिकारियों ने भी इस तथ्य को औपचारिक रूप से स्वीकार किया।

पे-स्केल (वेतनमान) के पुराने दर्जे की बहाली

कमेटी को इस बात से अवगत कराया गया कि 5वें वेतन आयोग के बाद से रेल इंजीनियरों के वेतनमान (Pay Scales) में लगातार गिरावट या डाउनग्रेडिंग की गई है। प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से पुरजोर मांग की कि इंजीनियरों के इस मूल और अधिकारिक दर्जे को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

फील्ड इंजीनियरों के लिए रिस्क अलाउंस (जोखिम भत्ता)

प्रतिनिधिमंडल ने विपरीत और खतरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले सभी फील्ड इंजीनियरों का मुद्दा भी उठाया। अधिकारियों के सामने एक मजबूत तर्क देते हुए मांग की गई कि इन कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले सभी फील्ड इंजीनियरों को ‘रिस्क अलाउंस’ प्रदान किया जाना चाहिए।

उम्मीद की नई किरण:

इस बैठक को रेल इंजीनियरों के अधिकारों की लड़ाई में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। SCREA नेताओं को उम्मीद है कि 8वां वेतन आयोग उनकी इन न्यायसंगत मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और अंतिम रिपोर्ट में इंजीनियरों को उनका उचित हक मिलेगा।



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