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    एमपी राज्यसभा चुनाव में ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ की एंट्री: कर्नाटक भाग रहे कांग्रेस विधायक; बाबू जंडेल बोले- ‘चार धाम करा दो’

    एमपी राज्यसभा चुनाव में ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ की एंट्री: कर्नाटक भाग रहे कांग्रेस विधायक; बाबू जंडेल बोले- ‘चार धाम करा दो’
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    भोपाल:
    BDC NEWS | bhopalonline.org

    मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट पर होने जा रहे चुनाव ने सूबे की सियासत में भारी गरमाहट ला दी है। कांग्रेस के कब्जे वाली इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा ऐन वक्त पर उम्मीदवार उतारने से मुकाबला बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण हो गया है। सोमवार को जहाँ एक तरफ कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामांकन दाखिल किया, वहीं बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट ने भी पर्चा भरकर कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी है।

    बीजेपी की इस चाल के बाद कांग्रेस को ‘क्रॉस वोटिंग’ का डर सताने लगा है। सोमवार देर शाम नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बंगले पर हुई विधायक दल की बैठक के बाद, अब सभी कांग्रेस विधायकों को भोपाल से सीधे कर्नाटक शिफ्ट किया जा रहा है।

    विधायक बाबू जंडेल की अनूठी मांग: “लगे हाथ चार धाम ही करा दो”

    सोमवार शाम नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर हुई डिनर पार्टी और बैठक में उस वक्त माहौल थोड़ा हल्का हो गया जब श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने एक अनोखी मांग रख दी।

    बाबू जंडेल ने कहा: “वैसे तो हम लोग दिन-रात अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के बीच व्यस्त रहते हैं। अब अगर पार्टी हमें 10 दिनों के लिए बाहर भेज ही रही है, तो हमें (कर्नाटक के बजाय) चार धाम की यात्रा पर ही भिजवा दिया जाए।”

    “हमारे संपर्क में भी बीजेपी विधायक” – अजय सिंह का बड़ा दावा

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच पूर्व नेता प्रतिपक्ष और चुरहट विधायक अजय सिंह ‘राहुल भैया’ ने एक बड़ा राजनीतिक दावा कर सनसनी फैला दी है। बैठक के बाद मीडिया से चर्चा में अजय सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा, “सब ठीक है, ऑल गुड। मेरे संपर्क में भी बीजेपी के कुछ विधायक हैं। अब चुनाव के दिन देखते हैं कि किसका संपर्क ज्यादा तगड़ा और मजबूत निकलता है।”

    वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि पार्टी को अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है, लेकिन मॉकपोल और वोटिंग की ट्रेनिंग के लिए रणनीतिक तैयारी जरूरी है। इस बहाने विधायकों का थोड़ा सैर-सपाटा भी हो जाएगा।

    महाराष्ट्र और तेलंगाना के दिग्गज भी भोपाल पहुंचे

    कांग्रेस इस चुनाव को लेकर कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन कराने के लिए महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन वसंतराव सपकाल और तेलंगाना पीसीसी चीफ बोम्मा माहेश कुमार गौड़ विशेष रूप से भोपाल पहुंचे। दोनों दिग्गजों ने एमपी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ रणनीति बनाई और सिंघार के बंगले पर हुए डिनर में शामिल हुए।

    मुख्य सचेतक सोहन बाल्मीकि ने स्पष्ट किया कि बीजेपी ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को खराब करने की कोशिश की है, जिसका कांग्रेस एकजुट होकर कड़ा जवाब देगी। दिल्ली हाईकमान का सख्त निर्देश है कि कोई भी पार्टी लाइन से अलग नहीं जाएगा।

    भविष्य के सियासी समीकरण (Future Political Equations)

    बीजेपी द्वारा महेश केवट को मैदान में उतारे जाने और कांग्रेस द्वारा ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ का सहारा लेने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में निम्नलिखित भविष्य के समीकरण बनते दिख रहे हैं:

    • संख्या बल बनाम सेंधमारी की कोशिश:
      तकनीकी रूप से कांग्रेस के पास अपनी सीट बचाने के लिए पर्याप्त विधायकों का संख्या बल मौजूद है। लेकिन बीजेपी ने आदिवासी और जमीनी कार्ड (महेश केवट) खेलकर कांग्रेस के भीतर असंतुष्ट गुटों में सेंध लगाने की रणनीति बनाई है। अगर बीजेपी इसमें सफल होती है, तो कांग्रेस के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा।
    • कमलनाथ और दिग्विजय युग के बाद नए नेतृत्व की परीक्षा:
      यह चुनाव प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के लिए ‘अग्निपरीक्षा’ जैसा है। यदि कांग्रेस अपने सभी वोटों को सुरक्षित रख पाने में कामयाब रहती है और मीनाक्षी नटराजन चुनाव जीतती हैं, तो संगठन पर पटवारी और सिंघार की पकड़ मजबूत होगी। इसके विपरीत, यदि कोई भी क्रॉस वोटिंग होती है, तो आंतरिक कलह और बढ़ेगी।
    • कर्नाटक शिफ्टिंग के मायने:
      कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में विधायकों को सुरक्षित रखना यह दर्शाता है कि कांग्रेस आलाकमान मध्य प्रदेश के स्थानीय नेतृत्व के भरोसे जोखिम नहीं लेना चाहता। बेंगलुरु या कर्नाटक के किसी रिसॉर्ट में विधायकों की बाड़ेबंदी से चुनाव के दिन तक उन्हें बाहरी दबाव और प्रलोभनों से दूर रखने की कोशिश की जाएगी।
    • आगामी चुनावों पर असर:
      इस राज्यसभा चुनाव का परिणाम मध्य प्रदेश में आने वाले स्थानीय निकाय उपचुनावों और भविष्य के सांगठनिक फेरबदल पर गहरा असर डालेगा। बीजेपी इस मुकाबले के जरिए कांग्रेस की एकजुटता के दावों की हवा निकालना चाहती है, जबकि कांग्रेस इसे ‘अन्याय के खिलाफ एकजुटता’ का प्रतीक बनाकर भुनाने की कोशिश करेगी।

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