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RBI का नया ECL नियम : 2 EMI चूके तो बैंकों को रखना होगा 12 गुना ज्यादा फंड; 730 से कम सिबिल वालों को लोन मिलना होगा मुश्किल

RBI का नया ECL नियम : 2 EMI चूके तो बैंकों को रखना होगा 12 गुना ज्यादा फंड; 730 से कम सिबिल वालों को लोन मिलना होगा मुश्किल
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नई दिल्ली:
BDC NEWS | bhopalonline.org

यदि आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर कम है या आप अक्सर अपने लोन की किस्तें (EMI) समय पर चुकाना भूल जाते हैं, तो आने वाला समय आपके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाला है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नया और सख्त नियम ‘ईसीएल डायरेक्शन-2026’ (ECL Direction-2026) 1 अप्रैल 2027 से लागू होने जा रहा है।

इस नए नियम के आने के बाद बैंकों के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई ग्राहक लगातार दो ईएमआई (EMI) चुकाने में चूक जाता है, तो बैंकों को सुरक्षा के तौर पर पहले के मुकाबले 12 गुना तक ज्यादा रकम अलग (Provisions के रूप में) रखनी होगी।

बैंकों को लगेगा 42,000 करोड़ का फटका, प्रीमियम ग्राहकों पर बढ़ेगा फोकस

रकम अलग रखने का सीधा मतलब यह है कि यह पैसा बैंक की बैलेंस शीट से ब्लॉक हो जाएगा, जिससे बैंक लोन रोटेशन नहीं कर पाएंगे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस नियम के कारण बैंकिंग इंडस्ट्री का कुल मुनाफा करीब 42,000 करोड़ रुपये कम हो सकता है। यही वजह है कि अब बैंक केवल ‘प्रीमियम ग्राहकों’ (730 से अधिक सिबिल स्कोर वाले) पर ही ज्यादा फोकस करेंगे।

संकट में 62% लोन आवेदक: 730 से कम सिबिल वालों की बढ़ेगी टेंशन

चिंता की बात यह है कि देश में लोन के लिए आवेदन करने वाले आधे से ज्यादा (करीब 62%) लोगों का सिबिल स्कोर 730 से कम है। नए नियम के बाद बैंक ऐसे कमजोर सिबिल स्कोर वाले लोगों को होम, ऑटो या एजुकेशन लोन देने से कतराएंगे। अगर लोन देंगे भी, तो:

  1. ब्याज दरें (Interest Rates) काफी ज्यादा वसूलेंगे।
  2. ज्यादा कोलेट्रल (गारंटी या सिक्योरिटी) की मांग करेंगे।

फेडरल बैंक के चीफ रिस्क ऑफिसर दमोदरन सी का कहना है: “नए नियमों के बाद बैंक उन ग्राहकों को कर्ज देने में ज्यादा कड़ाई बरतेंगे जिनमें जोखिम ज्यादा होगा। ऐसे ग्राहकों से ज्यादा ब्याज वसूला जाएगा, जबकि बेहतर क्रेडिट स्कोर वालों को ब्याज दरों में रियायतें मिलेंगी। अब बैंकों का पूरा फोकस लोन डूबने के जोखिम की पहले ही पहचान करने और रिकवरी पर होगा।”

FAQ: नए ECL सिस्टम से जुड़ी बड़ी बातें

1. नए सिस्टम से बैंकों के काम करने का तरीका कैसे बदलेगा?

अब तक बैंक तब रकम अलग रखते थे जब लोन पूरी तरह डूब जाता था (यानी 90 दिनों तक भुगतान न होने पर एनपीए बनता था)। लेकिन नए नियम (Expected Credit Loss) के तहत बैंकों को ज्योतिष की तरह पहले से ही अंदाजा लगाना होगा कि भविष्य में कौन सा लोन डूब सकता है, और उसके लिए पहले ही बड़ी रकम सुरक्षित रखनी होगी।

2. बैंक भविष्य में होने वाले डिफॉल्ट का आकलन कैसे करेंगे?

इसके लिए बैंक ग्राहकों के इन 5 पैमानों की कड़ाई से जांच करेंगे:

  • पुराना पेमेंट रिकॉर्ड और सिबिल हिस्ट्री में आ रहे बदलाव।
  • ग्राहक की आय (Income) में कमी या अचानक नौकरी जाने का खतरा।
  • लोन टू वैल्यू रेश्यो (LTV) – यानी आपकी संपत्ति की कीमत के मुकाबले लोन की कुल राशि कितनी है।

किस्त चूकने पर बैंकों को कितनी राशि अलग रखनी होगी? (25 लाख के होम लोन का गणित)

  • 30 दिन की चूक पर: अभी बैंक सिर्फ 10,000 रुपये अलग रखते हैं, नए नियम में यह 25,000 रुपये हो जाएगा।
  • 31 से 60 दिन (2 EMI) की चूक पर: अभी भी बैंक 10,000 रुपये ही अलग रखते हैं, लेकिन नए नियम में यह सीधे 12 गुना बढ़कर 1.25 लाख रुपये हो जाएगा।
  • 91 दिन से ज्यादा (NPA) होने पर: पहले ₹3.75 लाख (15%) अलग रखने होते थे, अब सीधे 5 लाख रुपये रखने होंगे।

जिन 38% प्रीमियम ग्राहकों पर बैंकों की नजर है, वे कितने हैं?

देश में 730 से अधिक सिबिल स्कोर वाले कुल प्रीमियम ग्राहकों की संख्या करीब 7 करोड़ है। अब सभी बैंक इन्हीं 7 करोड़ ग्राहकों को लोन बेचने के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे, जबकि कम सिबिल वाले करोड़ों लोग कतार से बाहर हो सकते हैं।

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