रामनीति में ही छिपे है ‘राजनीति’ और ‘पत्रकारिता ’ के आदर्श
सप्रे संग्रहालय में देवलिया स्मृति व्याख्यान भोपाल। भोपाल डॉट कॉम मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से ज्यादा ‘लोकतांत्रिक’ कोई नहीं है। ‘रामनीति’ के बगैर लोकतंत्र कदापि संभव नहीं है। ‘रामनीति’ में जिस तरह परहित का भाव छिपा हुआ है, वही पत्रकारिता का भी मूल है। आम जन के दु:ख और समस्याओं को सामने लाना पत्रकारिता का दायित्व…