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    कूनो नेशनल पार्क : चीता प्रोजेक्ट की बड़ी छलांग: 2 मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ा

    मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने आज कूनो नेशनल पार्क के क्वॉरेंटाइन बाड़े से 2 मादा चीतों को वन में स्वच्छंद विचरण के लिए विमुक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने आज कूनो नेशनल पार्क के क्वॉरेंटाइन बाड़े से 2 मादा चीतों को वन में स्वच्छंद विचरण के लिए विमुक्त किया।
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    श्योपुर:
    BDC News | bhopalonline.org

    मध्यप्रदेश अब आधिकारिक रूप से दुनिया का सबसे बड़ा ‘चीता हब’ बनने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों में से दो मादा चीतों, सीसीडी-2 (CCD-2) और सीसीडी-3 (CCD-3) को बाड़े से मुक्त कर खुले जंगल में आजाद किया। जैसे ही मुख्यमंत्री ने पिंजरे के द्वार खोले, चीतों ने अपनी रफ्तार से जंगल की ओर दौड़ लगा दी, जिसे देख वहां मौजूद वन्यजीव प्रेमी रोमांचित हो उठे।

    मध्यप्रदेश बना ‘चीता स्टेट’: कुनबा बढ़कर हुआ 57

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को केवल शरण ही नहीं दी, बल्कि उन्हें अपने परिवार का हिस्सा बनाया है। वर्तमान में राज्य में चीतों की कुल संख्या 57 हो गई है।

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    • कूनो नेशनल पार्क: 54 चीते
    • गांधी सागर अभ्यारण्य: 03 चीते

    उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट आज नित नए कीर्तिमान रच रहा है। नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब बोत्सवाना से आए चीते भी यहाँ के वातावरण में पूरी तरह ढल चुके हैं।”

    वाइल्ड लाइफ वैटनरी हॉस्पीटल का निरीक्षण

    मुख्यमंत्री ने कूनो प्रवास के दौरान पार्क के भीतर नवनिर्मित वाइल्ड लाइफ वैटनरी हॉस्पीटल का भी सघन निरीक्षण किया। उन्होंने वन्यजीवों के उपचार और उनके स्वास्थ्य प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों के बारे में डॉक्टरों से विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन्यजीवों के रखरखाव में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।

    ‘डबल इंजन’ सरकार और जैव विविधता का संगम

    सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश आज धर्म और निवेश के साथ-साथ जैव विविधता (Biodiversity) का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है। कूनो नदी के पास स्थित इस साइट पर चीतों की आजादी न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।


    प्रमुख उपस्थिति

    इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान मंत्री राकेश शुक्ला, वन विकास निगम अध्यक्ष रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष गुड्डी बाई आदिवासी सहित पीसीसीएफ समिता राजौरा और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


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