NEET पेपर लीक विवाद पर 36 दिन से जारी प्रदर्शन का असर
वैश्विक मीडिया ने बताया—सरकार छात्रों के दबाव में झुकी
नई दिल्ली।
BDC NEWS | bhopalonline.org
NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में उभरे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में छात्र पिछले 36 दिनों से जंतर-मंतर पर धरना दे रहे थे। इस्तीफे के बाद यह मुद्दा केवल देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी प्रमुखता से उभरा है। कई बड़े वैश्विक समाचार संस्थानों ने इसे अपनी टॉप स्टोरी के रूप में प्रकाशित किया और इसे सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका बताया।
BBC: सरकार ने छात्रों के गुस्से को हल्के में लिया

BBC ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि मोदी सरकार ने छात्र आंदोलन की गंभीरता का सही आकलन नहीं किया। शुरुआत में आंदोलन को नजरअंदाज किया गया, लेकिन जब प्रदर्शन तेज हुआ और संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई हुई, तब देशभर में प्रतिक्रिया बढ़ी।
रिपोर्ट के अनुसार, 2014 के बाद यह दूसरा बड़ा मौका है जब सरकार को किसी बड़े जनआंदोलन के आगे झुकना पड़ा है। इससे पहले लंबे किसान आंदोलन के बाद तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे।
द गार्डियन: 12 साल में पहली बार दबाव में मंत्री का इस्तीफा

ब्रिटेन के अखबार द गार्डियन ने इसे मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल की बड़ी घटना बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि पहली बार किसी वरिष्ठ और करीबी मंत्री को सार्वजनिक दबाव के कारण पद छोड़ना पड़ा है। अखबार ने यह भी उल्लेख किया कि आंदोलन युवाओं के एक नए संगठन CJP के नेतृत्व में शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर का विरोध बन गया।
न्यूयॉर्क टाइम्स: आंदोलन को पहले नहीं लिया गया गंभीरता से

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, छात्र आंदोलन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। शुरुआत में मंत्री ने इसे विपक्ष से प्रेरित बताते हुए खारिज किया था और प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादियों की बी-टीम’ तक कहा था। हालांकि, समय के साथ आंदोलन देश के कई शहरों में फैल गया और अंततः सरकार को झुकना पड़ा।
CNN: मीम से शुरू हुआ आंदोलन बना राष्ट्रीय मुद्दा

CNN की रिपोर्ट के अनुसार, यह आंदोलन शुरुआत में सोशल मीडिया के एक मीम से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में यह देशव्यापी विरोध में बदल गया। इसने युवाओं को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, बेहतर अवसर और जवाबदेही की मांग को लेकर एकजुट किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं की नाराजगी इस आंदोलन के पीछे बड़ा कारण रही।
अल जजीरा: छात्र आंदोलन की बड़ी जीत

अल जजीरा ने इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन बताते हुए कहा कि युवाओं ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की है।रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्री का इस्तीफा छात्रों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
डॉन: ‘कॉकरोच’ आंदोलन ने हासिल की सफलता

पाकिस्तान के अखबार डॉन ने लिखा कि पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी तय करने की मांग को लेकर यह आंदोलन लगातार मजबूत होता गया। इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया, राष्ट्रीय गान बजाया गया और मिठाइयां बांटी गईं।
आंदोलन का व्यापक प्रभाव
यह छात्र आंदोलन केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देश में युवाओं की बेरोजगारी और भविष्य को लेकर चिंता को भी सामने लाया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना आने वाले समय में शिक्षा प्रणाली और सरकारी जवाबदेही पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।