वार डेस्क|
BDC News|bhopalonline.org
मिडिल-ईस्ट की तपती धरती से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। पिछले एक महीने से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जिस भीषण जंग की आहट सुनाई दे रही थी, उस पर फिलहाल 14 दिनों का ‘पॉज बटन’ लग गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अब तक ईरान को कड़े अल्टीमेटम दे रहे थे, अपनी डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले अचानक नरम पड़ गए हैं। ट्रंप ने घोषणा की है कि वह अगले दो हफ़्तों के लिए ईरान पर किसी भी तरह के हमले या बमबारी को रोक रहे हैं। इस अचानक आए बदलाव के पीछे पाकिस्तान की भूमिका अहम बताई जा रही है। ट्रंप के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ हुई चर्चा के बाद उन्होंने कूटनीति को एक मौका देने का फैसला किया है।
ईरान की 10 शर्तें और पाकिस्तान की भूमिका
ईरान ने इस दो हफ़्तों के युद्धविराम को स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन इसे ‘शांति’ मानने से इनकार कर दिया है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर की ओर से आए 10-सूत्रीय प्रस्ताव ने अमेरिका की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ईरान की प्रमुख मांगें हैं:
- ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए।
- युद्ध से हुए नुकसान का पूरा मुआवजा दिया जाए।
- दुनिया भर में जब्त की गई ईरान की संपत्तियों को बहाल किया जाए।
इन मांगों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच एक हाई-लेवल बैठक होनी तय हुई है।
विवादों के घेरे में ‘शांति समझौता’
भले ही दावों में जंग रुकती दिख रही है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
- सोशल मीडिया पोस्ट का सच: पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद छिड़ गया है। दावा किया जा रहा है कि यह पोस्ट पहले से ही ड्राफ्ट किया हुआ था, जिससे लोग इसे एक ‘नियोजित स्क्रिप्ट’ बता रहे हैं।
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर टोल टैक्स: सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत ईरान और ओमान को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग ‘होर्मुज़’ से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांज़िट फ़ीस वसूलने की अनुमति मिल सकती है। अब तक यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पूरी तरह फ्री था।
ट्रंप के फैसले पर अमेरिका में घमासान
जहाँ ट्रंप इसे कूटनीतिक जीत बता रहे हैं, वहीं अमेरिका के भीतर ही उनका विरोध शुरू हो गया है। अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने इस फैसले को ‘पूर्ण आत्मसमर्पण’ करार दिया है। उनका कहना है कि होर्मुज़ जैसे सामरिक मार्ग का नियंत्रण ईरान को सौंपना पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
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