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कम उम्र में बढ़ता थायराइड: एक उभरती स्वास्थ्य चिंता और समाधान

सेहत में बात थायराइट की AI Image सेहत में बात थायराइट की AI Image
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गिरीश कुमार,
BDC News | bhopalonline.org

आज के दौर में थायराइड की समस्या केवल बुजुर्गों या महिलाओं तक सीमित नहीं रह गई है। हाल के वर्षों में बच्चों और किशोरों (Teeangers) में थायराइड विकार, विशेष रूप से ‘हाइपोथायरायडिज्म’, के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। थायराइड गले में स्थित एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा के स्तर और विकास को नियंत्रित करने वाले हार्मोन का उत्पादन करती है। जब यह ग्रंथि कम उम्र में असंतुलित होती है, तो इसका सीधा प्रभाव बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है।

कम उम्र में थायराइड बढ़ने के मुख्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, युवाओं में थायराइड बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण ‘ऑटोइम्यून थायरायडाइटिस’ या हाशिमोटो रोग है। इसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र अपनी ही थायराइड ग्रंथि पर हमला करने लगता है। इसके अलावा, आधुनिक जीवनशैली, अत्यधिक तनाव, जंक फूड का सेवन और आयोडीन की कमी या अधिकता भी इसके लिए जिम्मेदार है। आज के किशोरों में शारीरिक सक्रियता की कमी और स्क्रीन टाइम बढ़ने से शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ रहा है, जो थायराइड जैसी समस्याओं को जन्म दे रहा है।

प्रमुख लक्षण: शरीर क्या संकेत देता है?

कम उम्र में इसके लक्षण अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। यदि किसी बच्चे का वजन बिना किसी कारण के बढ़ रहा हो, उसे बहुत अधिक ठंड लगती हो, त्वचा में सूखापन हो या वे हमेशा सुस्त महसूस करते हों, तो यह बढ़ते थायराइड का संकेत हो सकता है। किशोरियों में मासिक धर्म की अनियमितता और बालों का झड़ना भी इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा, एकाग्रता में कमी और पढ़ाई में मन न लगना जैसे मानसिक लक्षण भी देखे जा सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय (Expert Version)

एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. समीर गुप्ता के अनुसार, “कम उम्र में थायराइड का पता चलना चिंताजनक जरूर है, लेकिन समय पर इलाज से इसे पूरी तरह प्रबंधित किया जा सकता है। माता-पिता को बच्चे की ‘ग्रोथ चार्ट’ पर ध्यान देना चाहिए। यदि बच्चे की लंबाई अचानक रुक गई है या वह अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में बहुत सुस्त है, तो तुरंत थायराइड प्रोफाइल टेस्ट (TSH, T3, T4) कराना चाहिए।” विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि शुरुआती स्तर पर पहचान होने से बच्चे की हड्डियों के विकास और मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को रोका जा सकता है।

बचाव और प्रबंधन के उपाय

थायराइड प्रबंधन में आहार और व्यायाम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चों को आयोडीन युक्त संतुलित भोजन दें। सोया उत्पादों और गोभी जैसी सब्जियों का अत्यधिक सेवन सीमित करें, क्योंकि ये हार्मोन उत्पादन में बाधा डाल सकते हैं। नियमित व्यायाम, जैसे तैराकी या साइकिल चलाना, मेटाबॉलिज्म को सुचारू रखता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि डॉक्टर ने दवा निर्धारित की है, तो उसे खाली पेट नियम से लेना चाहिए। दवा की खुराक में अपनी मर्जी से बदलाव करना खतरनाक हो सकता है।


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