शिवराज कैबिनेट के दस बड़े फैसले

शिवराज कैबिनेट के दस बड़े फैसले
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भोपाल. भोपाल डॉट कॉम


मेडिकल कॉलेजों में PG सीटों में वृद्धि, सरपंचों के मानदेय में इजाफा, शुरू होगी ये योजनाएं…

• सरपंचों के मानदेय को 1750 से बढ़ाकर अब 4250 रुपए प्रतिमाह देने का फैसला हुआ। इसमें दूरभाष और सत्कार भत्ता भी शामिल रहेगा। इसमें सरकार पर सालाना 69 करोड़ का भार आएगा

• प्रदेश में निर्विरोध निर्वाचन वाली ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत करने के लिए राशि बढ़ाने और नए पुरस्कार के प्रविधान के कार्योत्तर अनुमोदन का प्रस्ताव को मंजूरी। निर्विरोध सरपंच निर्वाचन पर 5 लाख रुपए, लगातार दूसरी बार निर्विरोध सरपंच चुने जाने पर 7 लाख रुपए, पंच, सरपंच के निर्विरोध निर्वाचन पर 7 लाख, सरपंच और सभी पंच के पदों पर निर्विरोध निर्वाचन पर 12 लाख रुपए दिए जाएंगे

• पंच, सरपंच सहित सभी पदों पर महिलाओं के निर्विरोध निर्वाचन पर 15 लाख का पुरस्कार देने का फैसला हुआ है

• चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पीजी सीट्स बढ़ाने के लिए 614 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी है

• 9200 सीएम राइज स्कूलों के निर्माण के लिए मंजूरी दी गई है। पहले चरण में 370 स्कूलों का निर्माण हो रहा है। 45 स्कूलों की डीपीआर बनकर तैयार हो गई है। 2660 करोड़ रुपए की मंजूरी पहले दी जा चुकी है

• एसटी वर्ग के छात्रों को कोचिंग के लिए आकांक्षा योजना शुरू की गई है। इसमें दो बैच में 800-800 बच्चों को कोचिंग दी जाएगी। इसमें संभाग स्तर पर ऑफलाइन कोचिंग संचालित होगी।

• 9वीं से 12 वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को फ्री कोचिंग कराई जाएगी। 10वीं में पास होने वाले बच्चों को कोचिंग संस्थानों में प्रवेश दिलाकर 11वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई कराई जाएगी

• 181 सीएम हेल्पलाइन में सीटें बढ़ाने का फैसला हुआ है। इसके कॉल सेंटर में 300 सीटें थीं। इनमें 120 सीटें और बढ़ाई जाएंगी

• पीएम मातृवंदना योजना 0.2 को जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इसमें 60% अंश केंद्र सरकार और 40% राज्य सरकार भागीदारी देती है

• इस योजना में पहले प्रसव के बाद माताओं को 5 हजार रुपए दिए जाते थे। अब दूसरी डिलीवरी में बेटी पैदा होने पर 6 हजार रुपए दिए जाएंगे

• 10 संभागीय ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय में नियमित पदों का सृजन और लैब में संविदा वर्ग तीन के समकक्ष पदों के सृजन की स्वीकृति निर्विरोध चुनी गई

• शौर्या दल योजना को फिर शुरू करने का फैसला हुआ। गांवों की महिलाएं और बेटियां पुलिस और ग्रामीणों के बीच सेतु का काम करेंगी

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