भोपाल। भूमिका तिवारी
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‘मन में अगर अटूट हौसला और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो हिमालय की गगनचुंबी चोटियां और बर्फीले तूफान भी आपका रास्ता नहीं रोक सकते।’ इस बात को सच कर दिखाया है भोपाल के होनहार विद्यार्थियों ने। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान ‘द भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज’ (BSSS) के छात्रों ने एक बार फिर इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज करा दिया है। कॉलेज के करीब 100 छात्र-छात्राओं के एक विशाल दल ने हिमाचल प्रदेश की दुर्गम और बेहद खूबसूरत पार्वती घाटी में स्थित ‘सर पास ट्रैक’ (Sar Pass Trek) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी कर देश का मान बढ़ाया है।
इस जांबाज दल ने समुद्र तल से लगभग 13,800 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर पहुंचकर न केवल अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता का लोहा मनवाया, बल्कि वहां पूरे गर्व और सम्मान के साथ भारत का राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ भी फहराया। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के साथ ही बीएसएसएस (BSSS) सर पास ट्रैक पर इतने बड़े पैमाने पर छात्रों का सफल अभियान (Expedition) आयोजित करने वाला देश का पहला कॉलेज बन गया है।
अचीवमेंट: चुनौतियों को मात देकर हासिल किया मुकाम
हिमाचल प्रदेश की पार्वती घाटी में स्थित सर पास ट्रैक को भारत के सबसे खूबसूरत लेकिन उतने ही खतरनाक और कठिन ट्रैकिंग रूटों में से एक माना जाता है। मई के इस मौसम में भी यहाँ का तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, और हर कदम पर जमी हुई बर्फ और खड़ी चढ़ाई ट्रैकर्स की कड़ी परीक्षा लेती है।
इस कठिन अभियान के बारे में जानकारी देते हुए कॉलेज प्रबंधन और दल के मार्गदर्शकों ने बताया कि यह कोई साधारण पिकनिक या टूर नहीं था, बल्कि एक बेहद चुनौतीपूर्ण साहसिक अभियान (Adventure Expedition) था। इसमें शामिल होने के लिए छात्रों ने कई हफ्तों तक कड़ी शारीरिक ट्रेनिंग ली थी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं में टीम भावना, नेतृत्व क्षमता (Leadership), कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने की कला (Survival Skills) और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना था।
बर्फ की सफेद चादर के बीच 100 युवाओं का जोश
जब 100 छात्रों का यह दल हिमाचल प्रदेश की वादियों में पहुंचा, तो उनका सामना तीखी ठंडी हवाओं, कम ऑक्सीजन और बिछी हुई बर्फ की सफेद चादर से हुआ। जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती गई, रास्ते और भी संकरे और फिसलन भरे होते गए। कई जगहों पर खड़ी बर्फीली चढ़ाई थी, जहाँ जरा सी चूक भी भारी पड़ सकती थी। लेकिन अनुभवी गाइडों की देखरेख और छात्रों के आपसी तालमेल ने इस मुश्किल को आसान बना दिया।
“जब हम 13,800 फीट की ऊंचाई पर पहुंचे, तो चारों तरफ सिर्फ बर्फ के पहाड़ और बादल थे। थकान चरम पर थी, लेकिन जैसे ही हमारे हाथों में तिरंगा आया और हमने उसे हवा में लहराया, हमारी सारी थकान गायब हो गई। वह पल रोंगटे खड़े कर देने वाला था।” — पलक सूर्यवंशी, अभियान में शामिल
देश का पहला कॉलेज जिसने रचा यह इतिहास
आमतौर पर इतने ऊंचे और कठिन ट्रैकिंग रूटों पर छोटे-छोटे समूहों (10 से 15 लोगों के ग्रुप) में ट्रैकिंग की जाती है, क्योंकि बड़े ग्रुप को एक साथ संभालना और बर्फीले रास्तों पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जोखिम भरा होता है। लेकिन ‘द भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज’ (BSSS) ने इस मिथक को तोड़ दिया।
कॉलेज ने पूरे अनुशासन और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए 100 स्टूडेंट्स के विशाल दल को इस अभियान पर भेजा और इसे सफलतापूर्वक पूरा भी कराया। पर्वतारोहण और साहसिक खेलों के विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को सर पास ट्रैक जैसे कठिन रूट पर ले जाना और बिना किसी दुर्घटना के सुरक्षित वापस लाना अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। इसी के साथ BSSS यह कीर्तिमान स्थापित करने वाला पहला कॉलेज बन गया है।
सर पास ट्रैक की खासियत और चुनौतियाँ
| विशेषता | विवरण |
| लोकेशन / क्षेत्र | पार्वती घाटी (Kullu – Parvati Valley), हिमाचल प्रदेश |
| कुल ऊंचाई | लगभग 13,800 फीट (समुद्र तल से) |
| कठिनाई का स्तर | मध्यम से कठिन (Moderate to Difficult) |
| मुख्य चुनौतियाँ | कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड, खड़ी बर्फीली चढ़ाई, स्नो स्टॉर्म का खतरा |
| उपलब्धि | 100 छात्रों द्वारा एक साथ सफल चढ़ाई और ध्वजारोहण |
इस ट्रैक को ‘सर पास’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्थानीय भाषा में ‘सर’ का अर्थ ‘जमे हुए पानी की झील’ होता है। इस ट्रैक को पार करते समय रास्ते में एक जमी हुई खूबसूरत झील आती है, जिसे पार करके ही आगे बढ़ा जा सकता है।
शहर में जश्न का माहौल
जैसे ही छात्रों के दल ने 13,800 फीट की ऊंचाई पर तिरंगा फहराने और बैनर के साथ अपनी ग्रुप फोटो साझा की, भोपाल में कॉलेज प्रबंधन, प्राध्यापकों और छात्रों के अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर इस गौरवमयी उपलब्धि की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और लोग भोपाल के इन युवाओं की हिम्मत की दाद दे रहे हैं।
कॉलेज का कहना है कि यह सफलता केवल उन 100 छात्रों की नहीं है, बल्कि पूरे भोपाल और मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह अभियान साबित करता है कि आज के युवा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति की सबसे कठिन चुनौतियों का सामना करने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।
कैमरे में कैद साहस

सर पास ट्रैक दल के सदस्य

कामयाबी की खुशी