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‘हीटवेव’ : अचानक बढ़ी गर्मी का शरीर पर प्रभाव: लक्षण, जोखिम और बचाव के उपाय

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गिरीश कुमार
BDC News | bhopalonline.org

अचानक बढ़ती गर्मी या ‘हीटवेव’ केवल असहजता का विषय नहीं है, बल्कि यह मानव शरीर के लिए एक गंभीर जैविक चुनौती है। जब पर्यावरण का तापमान शरीर के सामान्य तापमान ($37^{\circ}C$) से अधिक होने लगता है, तो हमारा ‘थर्मोरेगुलेटरी सिस्टम’ (तापमान नियंत्रण प्रणाली) दबाव में आ जाता है।

अचानक बढ़ी गर्मी और शारीरिक प्रतिक्रियाएं

1. डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन

गर्मी बढ़ने पर शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए पसीना निकालता है। यदि पानी का सेवन पर्याप्त न हो, तो शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है। इसके साथ ही सोडियम और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण लवण (Electrolytes) भी निकल जाते हैं, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन (Heat Cramps) और कमजोरी महसूस होने लगती है।

2. हीट थकावट (Heat Exhaustion)

यह हीट स्ट्रोक से पहले की अवस्था है। इसमें व्यक्ति को अत्यधिक पसीना आता है, चक्कर आते हैं, जी मिचलाता है और तेज सिरदर्द होता है। नाड़ी की गति (Pulse rate) तेज हो जाती है और रक्तचाप गिर सकता है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर अब गर्मी को झेलने में असमर्थ हो रहा है।

3. हीट स्ट्रोक (लू लगना) – एक मेडिकल इमरजेंसी

जब शरीर का तापमान $40^{\circ}C$ ($104^{\circ}F$) या उससे अधिक हो जाता है, तो इसे ‘हीट स्ट्रोक’ कहते हैं। इस स्थिति में शरीर का पसीना बनाने वाला सिस्टम काम करना बंद कर देता है और त्वचा सूखी व गर्म हो जाती है। यह मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है और घातक भी हो सकता है।

4. हृदय प्रणाली पर दबाव

गर्मी में शरीर की सतह (त्वचा) तक रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है ताकि गर्मी बाहर निकल सके। इससे हृदय को शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त पंप करने के लिए सामान्य से कहीं अधिक मेहनत करनी पड़ती है। हृदय रोगियों के लिए यह स्थिति दिल के दौरे के जोखिम को बढ़ा सकती है।

5. मानसिक स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक प्रभाव

अत्यधिक गर्मी न केवल शरीर बल्कि मस्तिष्क को भी प्रभावित करती है। अचानक बढ़ी गर्मी से चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और निर्णय लेने की क्षमता का कमजोर होना आम है। गंभीर स्थितियों में व्यक्ति भ्रमित (Confusion) हो सकता है या बेहोश भी हो सकता है।

6. त्वचा संबंधी समस्याएं

पसीने की ग्रंथियां बंद होने के कारण ‘घमौरियां’ (Heat Rash) हो सकती हैं। साथ ही, तेज धूप के सीधे संपर्क में आने से ‘सनबर्न’ का खतरा रहता है, जो त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाता है।


बचाव के मुख्य उपाय

  • तरल पदार्थों का सेवन: प्यास न लगने पर भी पानी, ओआरएस (ORS), नारियल पानी और नींबू पानी पीते रहें।
  • सही पहनावा: हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय सिर को टोपी या छाते से ढकें।
  • आहार में बदलाव: भारी और तैलीय भोजन के बजाय खीरा, तरबूज और दही जैसे ठंडे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें।
  • समय का चुनाव: दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच, जब गर्मी चरम पर हो, बाहर निकलने से बचें।

अचानक बढ़ी गर्मी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। यदि किसी व्यक्ति में बेहोशी, भ्रम या तेज बुखार के लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं और डॉक्टरी सहायता लें।


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