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    बुंदेली कढ़ी: बुंदेलखंड का पारंपरिक स्वाद, अब आपके किचन में.. जानते हैं रेसिपी

    आशा की रसोई में बुंदेली कढ़ी। आशा की रसोई में बुंदेली कढ़ी।
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    BDC News | bhopalonline.org

    बुंदेलखंड की रसोई में कढ़ी का एक विशेष स्थान है। यहाँ कढ़ी को सिर्फ मट्ठे और बेसन का घोल नहीं माना जाता, बल्कि इसे धीमी आंच पर घंटों पकाकर एक खास ‘सोंधापन’ दिया जाता है। बुंदेली कढ़ी की मुख्य विशेषता इसकी पकोड़ियाँ (जिन्हें यहाँ ‘झिझिया’ या फुलकी भी कहा जाता है) और इसका तीखा तड़का है।

    आवश्यक सामग्री (Ingredients)

    पकोड़ी (फुलकी) के लिए:

    • बेसन: 1 कप
    • लाल मिर्च पाउडर: 1/2 चम्मच
    • अजवाइन: 1/4 चम्मच
    • नमक: स्वादानुसार
    • हल्दी: एक चुटकी
    • तेल: तलने के लिए

    कढ़ी के घोल के लिए:

    • ताजा मट्ठा (छाछ) या खट्टा दही: 500 मिली (लगभग 2-3 कप)
    • बेसन: 1/2 कप
    • हल्दी पाउडर: 1 चम्मच
    • पानी: आवश्यकतानुसार (मट्ठा कितना गाढ़ा है उस आधार पर)

    तड़के और मसाले के लिए:

    • सरसों का तेल: 2 बड़े चम्मच
    • मेथी दाना: 1/2 चम्मच
    • जीरा: 1/2 चम्मच
    • हींग: 2 चुटकी (बुंदेली कढ़ी में हींग का स्वाद मुख्य होता है)
    • हरी मिर्च: 3-4 (बारीक कटी हुई)
    • साबुत लाल मिर्च: 2-3
    • कसा हुआ अदरक: 1 इंच टुकड़ा
    • करी पत्ता: 8-10
    • नमक: स्वादानुसार
    • हरा धनिया: बारीक कटा हुआ

    बनाने की विधि (Step-by-Step Instructions)

    1. पकोड़ी तैयार करना

    सबसे पहले एक बर्तन में बेसन लें, उसमें नमक, मिर्च, हल्दी और अजवाइन मिलाएं। थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर गाढ़ा घोल तैयार करें। घोल को 5-7 मिनट तक अच्छी तरह फेंटें (यही पकोड़ियों को नरम बनाने का राज है)। गरम तेल में छोटी-छोटी पकोड़ियाँ तल लें और उन्हें अलग रख दें।

    2. कढ़ी का घोल बनाना

    एक बड़े बर्तन में मट्ठा लें। इसमें बेसन और हल्दी डालकर अच्छी तरह फेंटें ताकि कोई गांठ न रहे। बुंदेली कढ़ी थोड़ी पतली रखी जाती है क्योंकि पकने के बाद यह गाढ़ी हो जाती है, इसलिए जरूरत पड़ने पर इसमें 1-2 गिलास पानी और मिलाएं।

    3. तड़का लगाना और पकाना

    एक भारी तले की कड़ाही में सरसों का तेल गरम करें। तेल से धुआं निकलने लगे तो इसमें मेथी दाना, जीरा, हींग, करी पत्ता, अदरक और मिर्च डालें। जैसे ही मसाले चटकने लगें, तैयार किया हुआ बेसन-मट्ठे का घोल धीरे-धीरे डालें।

    4. धीमी आंच पर ‘ओटाना’

    बुंदेली भाषा में कढ़ी को पकाने को ‘ओटाना’ कहते हैं। जब तक कढ़ी में एक उबाल न आ जाए, इसे लगातार चलाते रहें। उबाल आने के बाद आंच धीमी कर दें और इसे 30 से 40 मिनट तक पकने दें। बीच-बीच में चलाते रहें। जब कढ़ी के किनारे पर मलाई जैसी परत जमने लगे, तब समझें कि कढ़ी पक गई है।

    5. पकोड़ी डालना और अंतिम तड़का

    कढ़ी अच्छी तरह पक जाने के बाद इसमें तैयार पकोड़ियाँ डालें और 5 मिनट और पकाएं ताकि पकोड़ियाँ रस सोख लें। अब स्वादानुसार नमक डालें (नमक अंत में डालने से कढ़ी फटती नहीं है)। ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालें।

    खास टिप्स (Pro-Tips)

    • मिट्टी का बर्तन: अगर संभव हो तो कढ़ी को मिट्टी की हांडी में पकाएं, इससे बुंदेलखंड का असली सोंधापन आता है।
    • खट्टापन: कढ़ी के लिए हमेशा थोड़ा खट्टा मट्ठा इस्तेमाल करें।
    • धीमी आंच: कढ़ी को जितनी धीमी आंच पर और जितनी देर तक पकाएंगे, उसका स्वाद उतना ही निखर कर आएगा।

    बुंदेली कढ़ी को गरमा-गरम चावल या चूल्हे की बनी रोटियों के साथ परोसें। इसका तीखा और खट्टा स्वाद आपको सीधे बुंदेलखंड की याद दिला देगा।



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