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वर्किंग मदर्स मेंटल हेल्थ: ‘बर्नआउट’ को पहचानें और ऐसे करें तनाव का प्रबंधन

दोहरी जिम्मेदारी से जूझती महिलाएं। AI IMAGE दोहरी जिम्मेदारी से जूझती महिलाएं। AI IMAGE

लाइफ स्टाइल.
BDC News | bhopalonline.org

आज के दौर में महिलाएं घर और दफ्तर के बीच एक महीन धागे पर चल रही हैं। ‘सब कुछ बखूबी संभाल लेने’ की चाहत में अक्सर वे अपनी मानसिक शांति खो देती हैं। इसे ही चिकित्सा की भाषा में ‘बर्नआउट’ कहा जाता है। जब शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक थकान इस हद तक बढ़ जाए कि आप खुद को खाली महसूस करने लगें, तो समझ लीजिए कि आपको रुकने और संभलने की जरूरत है।

‘बर्नआउट’ के लक्षणों को समझना जरूरी

अक्सर महिलाएं थकान को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन बर्नआउट साधारण थकान से अलग है। इसके प्रमुख लक्षण है…

  • हर समय चिड़चिड़ापन महसूस करना।
  • काम में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई।
  • पर्याप्त नींद के बाद भी सुबह उठते ही थकान महसूस होना।
  • अपने पसंदीदा शौकों या परिवार के साथ समय बिताने में अरुचि।
  • सिरदर्द या पाचन संबंधी समस्याएं जो बार-बार होती हैं।

‘परफेक्शन’ के जाल से बाहर निकलें

वर्किंग मदर्स पर अक्सर यह दबाव होता है कि उनका घर भी चमकता रहे और ऑफिस की प्रेजेंटेशन भी बेस्ट हो।

  • स्वीकार करें: यह समझना जरूरी है कि हर दिन 100% परफेक्ट होना मुमकिन नहीं है।
  • प्राथमिकता तय करें: तय करें कि आज क्या जरूरी है। अगर किसी दिन बर्तन सिंक में रह जाएं या ऑफिस का एक ईमेल कल के लिए टल जाए, तो खुद को दोषी (Guilty) महसूस न कराएं।

‘ना’ कहना सीखें (The Power of No)

बर्नआउट का सबसे बड़ा कारण है अपनी क्षमता से अधिक जिम्मेदारियां लेना।

  • ऑफिस में: यदि आपके पास पहले से काम ज्यादा है, तो विनम्रता से अतिरिक्त प्रोजेक्ट के लिए मना करें।
  • सामाजिक जीवन में: हर पारिवारिक समारोह या इवेंट में शामिल होना जरूरी नहीं है। अपनी ऊर्जा को बचाना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।

डेलिगेशन: काम बांटने की आदत डालें

याद रखें, आप ‘अकेली’ पूरे घर की जिम्मेदारी उठाने के लिए बाध्य नहीं हैं।

  • पार्टनर की मदद लें: घर के कामों और बच्चों की जिम्मेदारी में जीवनसाथी को बराबर का भागीदार बनाएं।
  • बच्चों को सिखाएं: उम्र के अनुसार बच्चों को छोटे-छोटे काम (जैसे खिलौने समेटना) सौंपें। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और आपका बोझ भी कम होगा।

‘मी-टाइम’ (Me-Time) के लिए समय निकालें

स्वयं के लिए समय निकालना स्वार्थ नहीं, बल्कि मानसिक जरूरत है।

  • दिनभर में कम से कम 15-20 मिनट ऐसे निकालें जिसमें आप वह करें जो आपको पसंद है—जैसे संगीत सुनना, किताब पढ़ना, या सिर्फ शांति से चाय पीना।
  • यह छोटा सा ब्रेक आपके दिमाग को ‘रिसेट’ करने में मदद करता है।

पेशेवर मदद लेने में संकोच न करें

अगर आपको लगता है कि तनाव आपके नियंत्रण से बाहर जा रहा है या आप लगातार उदास महसूस कर रही हैं, तो किसी मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से बात करें। मानसिक स्वास्थ्य के लिए थेरेपी लेना उतना ही सामान्य है जितना शारीरिक बीमारी के लिए डॉक्टर के पास जाना।


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