Headlines

‘बसामन मामा गोधाम’ बनेगा प्राकृतिक खेती का नेशनल मॉडल- अमित शाह

‘बसामन मामा गोधाम’ बनेगा प्राकृतिक खेती का नेशनल मॉडल- अमित शाह
👁️ 45 Views

Highlights


  • बीमारियों पर प्रहार: रासायनिक खेती को बीमारियों की जड़ बताकर प्राकृतिक खेती को ‘सेहत का बीमा’ करार दिया।
  • आर्थिक मॉडल: एक एकड़ भूमि से सवा लाख रुपये तक की आय का लक्ष्य, जो छोटे किसानों के लिए वरदान है।
  • प्रशासनिक सफलता: रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल के नेतृत्व में गो-काष्ठ और गोनाइल जैसे उत्पादों के माध्यम से रोजगार सृजन।
  • सहकारिता का हाथ: उपज की मार्केटिंग और एक्सपोर्ट के लिए केंद्र सरकार की व्यापक तैयारी।

AI से प्रमुख बिंदु विश्लेषण


रीवा: अजय तिवारी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का रीवा प्रवास न केवल राजनीतिक लिहाज से, बल्कि कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे गया। गृह मंत्री ने बसामन मामा गोधाम का दौरा कर स्पष्ट कर दिया कि भारत अब ‘केमिकल मुक्त खेती’ की ओर कदम बढ़ा चुका है। उनके संबोधन में गाय, खेती और किसान की आय को जोड़ने वाला एक ठोस ‘इकोनॉमिक मॉडल’ दिखाई दिया।

बसामन मामा गोधाम: विंध्य का नया गौरव

रीवा, जो अब तक अपने विशाल सोलर प्लांट के लिए जाना जाता था, अब प्राकृतिक खेती के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर रहा है। शाह ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के विजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि 52 एकड़ में फैला यह गो-अभ्यारण्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया केंद्र है। यहाँ 9 हजार से अधिक गोवंश की सेवा के साथ-साथ गोबर और गोमूत्र से दलहन, चावल और सरसों जैसी फसलों का उत्पादन बिना किसी रसायन के किया जा रहा है।

1 गाय और 21 एकड़ खेती: स्वास्थ्य और समृद्धि का सूत्र

अमित शाह ने एक क्रांतिकारी आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि एक देशी गाय के माध्यम से 21 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती संभव है। उन्होंने रासायनिक खादों को कैंसर, बीपी और शुगर जैसी बीमारियों की जड़ बताया। गृह मंत्री ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं अपने खेत में प्राकृतिक खेती अपनाई है, जिससे उत्पादन घटने के बजाय बढ़ा है। देश में लगभग 40 लाख किसान इस पद्धति से जुड़ चुके हैं, जो भविष्य की ‘ग्रीन इकोनॉमी’ का आधार है।

ग्लोबल मार्केट और सर्टिफिकेशन: किसानों को मिलेगी डेढ़ गुना आय

समीक्षात्मक दृष्टि से देखा जाए तो गृह मंत्री का सबसे बड़ा संदेश सहकारिता और सर्टिफिकेशन को लेकर था। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने दो नई सहकारी संस्थाएं बनाई हैं जो किसानों की उपज का परीक्षण, पैकेजिंग और निर्यात करेंगी। देशभर में प्रस्तावित 400 से अधिक आधुनिक प्रयोगशालाएं किसानों को प्रमाण पत्र देंगी, जिससे उनकी उपज को वैश्विक बाजार में बेहतर दाम मिलेगा और आय लगभग डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगी।

सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संकल्प: ‘वृक्षों में मैं पीपल हूँ’

शाह ने केवल खेती की बात नहीं की, बल्कि इसे भारतीय संस्कृति और पर्यावरण से भी जोड़ा। गीता के संदर्भ (वृक्षों में मैं पीपल हूँ) का उल्लेख करते हुए उन्होंने हर गांव में पांच पीपल के वृक्ष लगाने का संकल्प दिलाया। पीपल का वृक्ष सर्वाधिक ऑक्सीजन प्रदान करता है, जो ‘हेल्थ-इकोसिस्टम’ को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *