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    MP निगम-मंडल नियुक्तियां: जमीनी कार्यकर्ताओं और दलबदलुओं के बीच फंसेगी पेच?

    मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल
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    भोपाल| BDC News|bhopalonline.org

    मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले कई महीनों से प्रतीक्षित निगम-मंडल नियुक्तियों की घड़ी अब करीब आ गई है। भाजपा संगठन के गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, नियुक्तियों की फाइलें अब अंतिम चयन के लिए टेबल पर पहुँच चुकी हैं। दिल्ली प्रवास से लौटने के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच हुए मैराथन मंथन ने साफ कर दिया है कि इस बार ‘रिवॉर्ड’ केवल उन्हें मिलेगा जिन्होंने संगठन की कसौटी पर खुद को साबित किया है।

    जमीनी कार्यकर्ताओं की ‘बल्ले-बल्ले’ या अपनों की अनदेखी?

    भाजपा के भीतर इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्राथमिकता किसे मिलेगी? हाल ही में पार्टी ने 62 जिला प्रभारियों की नियुक्ति कर संगठन को नई धार दी है। अब निगम-मंडलों के जरिए उन कर्मठ कार्यकर्ताओं को साधने की तैयारी है, जो वर्षों से दरी बिछा रहे हैं लेकिन सत्ता के लाभ से दूर हैं। हेमंत खंडेलवाल का फोकस ‘प्योर कैडर’ पर है, ताकि कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाए कि पार्टी उनकी मेहनत को नजरअंदाज नहीं करती।

    सियासी मजबूरी: दलबदलुओं और ‘हारे’ हुए दिग्गजों का समायोजन

    इस नियुक्ति प्रक्रिया में सबसे पेचीदा मामला उन नेताओं का है जो विधानसभा चुनाव में बेहद कम अंतर से हार गए थे। साथ ही, कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए नेताओं की एक लंबी कतार है, जिन्हें ‘एडजस्ट’ करना मुख्यमंत्री के लिए बड़ी चुनौती है। राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी लोकसभा और स्थानीय चुनावों के समीकरणों को देखते हुए, पार्टी कुछ महत्वपूर्ण निगमों में इन चेहरों को जगह दे सकती है ताकि क्षेत्रीय असंतोष को थामा जा सके।

    अनुभव और वैचारिक निष्ठा का संगम

    नियुक्तियों से पहले नेताओं के पिछले 5-10 वर्षों के कार्य, उनके अनुभव और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा की सूक्ष्म समीक्षा की गई है। भाजपा इस बार केवल पद नहीं बांट रही, बल्कि ‘सरकार और संगठन’ के बीच एक मजबूत सेतु बनाने की कोशिश में है। इन नियुक्तियों के माध्यम से पार्टी की वैचारिक गतिविधियों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

    अंतिम चरण में चयन प्रक्रिया

    मुख्यमंत्री आवास और प्रदेश भाजपा कार्यालय में बैठकों का दौर जारी है। सूत्रों की मानें तो सूची को अंतिम रूप देने से पहले हाईकमान की सहमति ली जा रही है। माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक कई प्रमुख निगमों और बोर्डों के अध्यक्ष व उपाध्यक्षों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। इससे न केवल संगठन में नई ऊर्जा का संचार होगा, बल्कि भविष्य की चुनावी चुनौतियों के लिए भाजपा की ‘नई टीम’ भी तैयार हो जाएगी।


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