भोपाल।
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गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) के कार्यान्वयन को लेकर आमजन में कई प्रकार की जिज्ञासाएं और सवाल हैं। इस कानून का मुख्य उद्देश्य किसी धर्म विशेष की परंपराओं को खत्म करना नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों में एकरूपता लाना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने इसका प्रेजेंटेशन दिया गया। मुख्यमंत्री ने कुछ सुझाव दिए हैं, जिन्हें शामिल करने के बाद समिति अंतिम ड्राफ्ट सरकार को सौंपेगी। आइए, इस कानून के प्रमुख पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।
1. धार्मिक रीति-रिवाजों का सम्मान और शादी की स्वतंत्रता
यूसीसी के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी समुदाय की धार्मिक मान्यताओं, रीति-रिवाजों और रस्मों पर कोई आंच नहीं आएगी। विवाह की प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक तरीके से ही संपन्न होगी—चाहे वह हिंदुओं की ‘सप्तपदी’ और ‘फेरे’ हों, सिखों का ‘आनंद कारज’, मुस्लिम ‘निकाह’ या ईसाई ‘चर्च मैरिज’। कानून का उद्देश्य सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि विवाह के बाद मिलने वाले कानूनी अधिकार, दायित्व और सुरक्षा सभी नागरिकों के लिए समान हों।
2. विवाह का अनिवार्य पंजीकरण: समय-सीमा और प्रक्रिया
नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक विवाह का सरकारी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। यदि विवाह गुजरात की सीमा के भीतर या बाहर हुआ है, लेकिन वर-वधू में से कोई भी एक पक्ष गुजरात का निवासी है, तो शादी का पंजीकरण कराना होगा।
- समय-सीमा: विवाह के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास आवेदन जमा करना होगा।
- विलंब होने पर: यदि किसी कारणवश समय निकल जाता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत विलंब शुल्क के साथ आवेदन किया जा सकता है।
- पंजीकरण का महत्व: केवल पंजीकरण न होने से शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

3. पुराने विवाह और तलाक का रिकॉर्ड
यूसीसी केवल नई शादियों तक सीमित नहीं है। इसमें पुरानी शादियों और पहले से हुए तलाक के मामलों को भी सरकारी डेटाबेस में शामिल करने का प्रावधान है। जिन विवाहों का पहले पंजीकरण नहीं हुआ था, उन्हें भी अब आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कराया जा सकेगा। इसी तरह, अदालत द्वारा दिए गए तलाक या विवाह निरस्तीकरण के आदेशों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे भविष्य में कानूनी विवादों में स्पष्टता बनी रहे।
4. भरण-पोषण और बच्चों की सुरक्षा
इस संहिता ने परिवार के सदस्यों के अधिकारों को व्यापक रूप से परिभाषित किया है।
- भरण-पोषण का दायरा: इसमें केवल भोजन या आवास ही नहीं, बल्कि शिक्षा, चिकित्सा, वस्त्र और विशेष जरूरतों का ध्यान रखना भी शामिल है।
- कस्टडी: बच्चों की सुरक्षा और अभिरक्षा (कस्टडी) को लेकर पारदर्शी नियम बनाए गए हैं, जो सभी समुदायों पर एक समान लागू होंगे।
5. उत्तराधिकार और संपत्ति का निष्पक्ष बंटवारा
बिना वसीयत मृत्यु होने की स्थिति में, संपत्ति का बंटवारा अब एक समान कानून से होगा।
- प्राथमिकता: उत्तराधिकारियों की श्रेणी (प्रथम और द्वितीय) स्पष्ट कर दी गई है।
- विशेष अधिकार: गर्भ में पल रहे बच्चे को भी उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता दी गई है।
- अधिकारों का संरक्षण: हत्या का दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को संपत्ति में कोई अधिकार नहीं मिलेगा। इसके विपरीत, किसी भी शारीरिक विकलांगता या बीमारी के आधार पर उत्तराधिकारी को उसके हक से वंचित नहीं किया जा सकेगा।
6. वसीयत (Will) के प्रबंधन के लिए स्पष्ट नियम
गुजरात यूसीसी में वसीयत को लेकर एक विशेष अध्याय है। इसमें यह तय किया गया है कि वसीयत कौन बना सकता है और उसे कानूनी रूप से कैसे सुरक्षित किया जा सकता है।
- धोखाधड़ी पर रोक: यदि वसीयत दबाव, जबरदस्ती या धोखाधड़ी से बनाई गई है, तो उसे अदालत द्वारा अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।
- संपत्ति की सुरक्षा: विवादित संपत्ति या जहां उत्तराधिकारी स्पष्ट न हों, वहां अदालत ‘क्यूरेटर’ नियुक्त कर सकती है ताकि संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
7. डिजिटल रिकॉर्ड और प्रशासनिक व्यवस्था
पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार एक केंद्रीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी। इसके लिए ‘रजिस्ट्रार जनरल’ और ‘रजिस्ट्रार’ नियुक्त किए जाएंगे। किसी भी विवाद की स्थिति में नागरिक के पास रजिस्ट्रार के निर्णय के खिलाफ अपील करने का पूरा अधिकार होगा। झूठी जानकारी देने या रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करने पर दंड का भी प्रावधान है।
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