कोलकाता/नई दिल्ली|
BDC News | bhopalonline.org
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य में अभूतपूर्व संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा कर दी है। चुनाव परिणामों में मिली हार के बावजूद कार्यवाहक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। 5 मई 2026 को एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे लोकभवन जाकर अपना त्यागपत्र नहीं सौंपेंगी।
इस्तीफा न देने का फैसला और संवैधानिक पेच
संवैधानिक परंपरा के अनुसार, चुनाव परिणाम आने के बाद जब सत्ताधारी दल बहुमत खो देता है, तो मुख्यमंत्री को राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपना होता है, ताकि नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो सके। हालांकि, ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए इसे ‘नैतिक जीत’ करार दिया है। उनका तर्क है कि चूंकि चुनाव प्रक्रिया ही दूषित थी, इसलिए वे हार स्वीकार कर इस्तीफा नहीं देंगी। इस फैसले से राज्य में राज्यपाल की भूमिका अहम हो गई है और बंगाल एक बड़े संवैधानिक गतिरोध की ओर बढ़ता दिख रहा है।
‘100 सीटें लूटी गईं और 90 लाख नाम काटे गए’
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि भाजपा ने चुनाव आयोग को एक ‘औजार’ की तरह इस्तेमाल किया है। जाने ममता ने कौन-कौन से आरोप लगाए..
- मतदाता सूची में हेराफेरी: ममता के अनुसार, सुनियोजित तरीके से 90 लाख मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए।
- सीटों की लूट: उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी 100 सीटें भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर ‘लूट’ लीं।
- अधिकारियों का तबादला: चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस के प्रति सहानुभूति रखने वाले IPS और IAS अधिकारियों को हटाकर भाजपा की पसंद के अफसरों को तैनात किया गया।
EVM और चुनाव आयोग पर ‘खलनायक’ होने का आरोप
ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को चुनाव का ‘खलनायक’ बताते हुए EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने तकनीक पर संदेह जताते हुए पूछा, “वोटिंग के बाद EVM मशीन 80-90% चार्ज कैसे रह सकती है? तकनीकी रूप से इसे 40% के आसपास होना चाहिए था।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतगणना केंद्रों पर उनके एजेंटों के साथ मारपीट की गई और उन्हें बाहर निकाल दिया गया।
‘आजाद पंछी’ की तरह ‘इंडी’ गठबंधन को करेंगी मजबूत
सत्ता खोने के बाद ममता बनर्जी अब राष्ट्रीय राजनीति में खुद को एक ‘फ्री बर्ड’ (आजाद पंछी) के रूप में देख रही हैं। उन्होंने बताया कि विपक्षी गठबंधन (इंडी) के नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव उनके साथ खड़े हैं।
“अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं एक आम नागरिक हूँ। अब कोई यह नहीं कह सकता कि मैं सत्ता का उपयोग कर रही हूँ। अखिलेश यादव कल कोलकाता आ रहे हैं, और अब मैं पूरे देश में घूमकर इस अन्याय के खिलाफ ‘इंडी’ गठबंधन को मजबूत करूँगी।”
ममता ने भावुक होते हुए यह भी कहा कि पिछले 15 वर्षों में उन्होंने अपनी पूरी सेवा मुफ्त की है और कभी वेतन या पेंशन का लाभ नहीं लिया।
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