पटना।
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बिहार की सत्ता के गलियारे आज उस क्षण के गवाह बने हैं, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक असंभव मानी जा रही थी। बात पटना के राजभवन और भाजपा कार्यालय के बीच बदली हवा की कर रहा हूं, जहाँ हवाओं में एक बड़े बदलाव की महक है। बिहार में ‘नीतीश युग’ के समापन के बाद अब सम्राट चौधरी के रूप में भाजपा अपना पहला मुख्यमंत्री देने जा रही है।
राजभवन की वो ऐतिहासिक घड़ी
दोपहर के ठीक 3:17 बजे थे, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का काफिला राजभवन पहुँचा। हमारे कैमरे देख रहे थे कि उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। उन्होंने राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसके साथ ही बिहार की राजनीति का एक लंबा अध्याय बंद हो गया। राजभवन से बाहर निकलते वक्त नीतीश कुमार ने जिस तरह हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन किया, वह संकेत था कि वे अब सत्ता की इस कमान को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
भाजपा कार्यालय में ‘सम्राट’ का राजतिलक
इधर वीर चंद्र पटेल मार्ग पर भाजपा कार्यालय का नजारा देखने लायक है। ढोल-नगाड़ों और ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान ने जैसे ही सम्राट चौधरी के नाम की घोषणा की, कार्यकर्ताओं ने उन्हें कंधों पर उठा लिया। राजद और जदयू के रास्ते होते हुए भाजपा के शीर्ष तक पहुँचने वाले सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री चुना जाना केवल एक पद का मिलना नहीं है, बल्कि बिहार में भाजपा के पूर्ण वर्चस्व की शुरुआत है।
नीतीश की ‘मौन’ सहमति, भाजपा का मास्टरस्ट्रोक
सूत्रों की मानें तो इस पूरे ‘ऑपरेशन बिहार’ की पटकथा बहुत पहले लिखी जा चुकी थी। दिलचस्प बात यह है कि नीतीश कुमार ने न केवल इस्तीफा दिया, बल्कि सम्राट चौधरी के नाम पर अपनी मौन सहमति भी दी। अब से कुछ देर बाद एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक लोकभवन में होने जा रही है, जहाँ गठबंधन के सभी साथी सम्राट चौधरी के नाम पर अपनी अंतिम मुहर लगाएंगे।
पटना में जश्न और कल का इंतजार
शाम 5 बजे के करीब एनडीए का प्रतिनिधिमंडल नई सरकार बनाने का दावा पेश करेगा। पूरे पटना में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कल सुबह 11 बजे लोकभवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने पटना पहुँच सकते हैं।
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