भोपाल. डिजिटल डेस्क
BDC NEWS | bhopalonline.org
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, इस क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। यह उपचुनाव राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यहाँ का मुकाबला सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच सीधा माना जा रहा है।
उपचुनाव का विस्तृत कार्यक्रम
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराई जाएगी। मतदान सभी केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के माध्यम से होगा। उपचुनाव का मुख्य विवरण इस प्रकार है:
- अधिसूचना जारी: 6 जुलाई 2026
- नामांकन की अंतिम तिथि: 13 जुलाई 2026
- नामांकन पत्रों की जांच: 14 जुलाई 2026
- नाम वापसी की अंतिम तारीख: 16 जुलाई 2026
- मतदान की तिथि: 30 जुलाई 2026
- मतगणना और परिणाम: 3 अगस्त 2026
- निर्वाचन प्रक्रिया समापन: 4 अगस्त 2026
राजनीतिक बयानबाजी: भाजपा और कांग्रेस का अपना-अपना दावा
उपचुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है। जहाँ एक ओर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विश्वास जताया है कि जीत निश्चित रूप से भाजपा की होगी, वहीं उन्होंने नरोत्तम मिश्रा की उम्मीदवारी पर पत्ते नहीं खोले हैं। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सिंघार का दावा है कि दतिया की जनता 2023 में राजेंद्र भारती को चुन चुकी है और इस उपचुनाव में वे फिर से कांग्रेस के साथ खड़ी होगी।
दतिया सीट खाली होने की वजह: क्या है पूरा कानूनी घटनाक्रम?
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के कारण आई है। अप्रैल 2026 में दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने राजेंद्र भारती को 1998 के बैंक एफडी फर्जीवाड़े मामले में दोषी करार देते हुए 3 साल की सजा सुनाई थी।
कानून क्या कहता है?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) और सुप्रीम कोर्ट के ‘लिली थॉमस बनाम भारत संघ’ फैसले के अनुसार, यदि किसी विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाती है। चूंकि राजेंद्र भारती को दोषसिद्ध ठहराया गया था, इसलिए मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने उन्हें अयोग्य घोषित करते हुए सीट रिक्त होने की अधिसूचना जारी कर दी।
यह मामला 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में रिकॉर्ड हेरफेर कर ब्याज की राशि निकालने से जुड़ा है, जिसमें राजेंद्र भारती को अदालत ने दोषी पाया था।्र
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