एके तिवारी, ज्योतिषाचार्य
BDC NEWS | bhopalonline.org
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण मास केअवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। श्रावण कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर शुक्रवार सुबह तड़के भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दरबार में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। अपने आराध्य के एक झलक पाने के लिए भक्त देर रात से ही लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। अलसुबह भगवान महाकाल के पट खुलते ही पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
रात 3 बजे खुले पट, वीरभद्र जी की आज्ञा से शुरू हुई परंपरा
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रावण कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर शुक्रवार तड़के ठीक 3 बजे मंदिर के पट खोले गए। सबसे पहले वीरभद्र जी से आज्ञा प्राप्त करने के बाद गर्भगृह के द्वार खोले गए। इसके पश्चात पंडे-पुजारियों ने विधि-विधान के साथ गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन किया। परंपरा के अनुसार, भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस का उपयोग शामिल था। प्रथम घंटाल बजाकर हरि-ओम का जल अर्पित किया गया।
भव्य श्रृंगार और महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पण
पूजन और जलाभिषेक के बाद पुजारियों एवं पुरोहितों द्वारा भगवान महाकाल का अत्यंत मनमोहक और भव्य श्रृंगार किया गया। कपूर आरती के पश्चात भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इस बार के श्रृंगार की मुख्य विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल को चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिशूल और त्रिनेत्र से अलंकृत किया गया था। इसके उपरांत, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच संपन्न हुई इस भस्म आरती के दर्शन कर भक्त भाव-विभोर हो गए। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों का संशोधित समय सारिणी
श्रावण मास के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने आरतियों के समय में विशेष बदलाव किए हैं, जो आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक प्रभावी रहेंगे:
- भस्म आरती: प्रात: 3:00 बजे से 6:00 बजे तक
- दद्योदक आरती: प्रात: 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- भोग आरती: प्रात: 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन: सायं 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती: सायं 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- शयन आरती: रात्रि 10:30 बजे से 11:00 बजे तक
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