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    विश्व युद्ध का खतरा टलेगा? ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ से ईरान-अमेरिका जंग थमने की उम्मीद; अगले 48 घंटे बेहद अहम

    विश्व युद्ध का खतरा टलेगा? ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ से ईरान-अमेरिका जंग थमने की उम्मीद; अगले 48 घंटे बेहद अहम
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    अंतरराष्ट्रीय डेस्क: BDC News| bhopalonline.org

    Iran-US War Update: मिडिल ईस्ट में जारी बारूद की गंध और आसमान से बरसती मिसाइलों के बीच शांति की एक धुंधली किरण दिखाई दी है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष को विराम देने के लिए पाकिस्तान ने एक ‘शांति प्रस्ताव’ (Peace Proposal) तैयार किया है, जिसे ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ का नाम दिया गया है। ‘टाइम्स ऑफ इजराइल’ की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते पर दोनों महाशक्तियों के बीच सहमति बनने के आसार बढ़ गए हैं।

    क्या है ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’? दो चरणों में थमेगी जंग

    पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित इस शांति सौदे को दो मुख्य हिस्सों में विभाजित किया गया है, ताकि दोनों देशों को अपनी सैन्य रणनीति को व्यवस्थित करने का समय मिल सके:

    1. प्रथम चरण (तत्काल प्रभाव): इसके तहत दोनों देशों को अपनी सीमाएं और सैन्य ठिकाने शांत करने होंगे। तत्काल सीजफायर लागू किया जाएगा ताकि मानवीय सहायता और कूटनीतिक रास्ते खुल सकें।
    2. द्वितीय चरण (15-20 दिन): सीजफायर लागू होने के दो से तीन सप्ताह के भीतर एक स्थायी समझौता फाइनल किया जाएगा। इसमें विवादित मुद्दों पर लिखित सहमति और भविष्य की सुरक्षा गारंटी शामिल होगी।

    अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सिओस’ के मुताबिक, इस समझौते के तहत शुरुआती 45 दिनों का अस्थायी संघर्ष विराम लागू किया जा सकता है।

    पाकिस्तान के आर्मी चीफ की ‘मैराथन’ कूटनीति

    इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर एक मुख्य मध्यस्थ के रूप में उभरे हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि मुनीर ने अमेरिकी और ईरानी शीर्ष नेतृत्व के साथ पूरी रात लंबी बातचीत की है। पाकिस्तान के साथ-साथ मिस्र (Egypt) और तुर्किये भी इस त्रिकोणीय मध्यस्थता का हिस्सा हैं।

    इस डील का सबसे बड़ा बिंदु ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है। अगर यह रास्ता खुलता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति जो पिछले कुछ दिनों से ठप पड़ी है, फिर से सामान्य हो सकेगी।

    युद्ध के मैदान से तीन बड़ी तस्वीरें और हलचल

    समझौते की बातचीत के बीच भी रविवार को युद्ध के मैदान में भारी तनाव देखा गया:

    • लेबनान में हमला: इजराइली वायुसेना ने रविवार को लेबनान स्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भीषण बमबारी की। इजराइल का दावा है कि ये ठिकाने ईरान द्वारा समर्थित थे और यहाँ से हमले की योजना बनाई जा रही थी।
    • ड्रोन फुटेज: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें अमेरिकी युद्धक विमानों को ईरानी ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराते हुए दिखाया गया है।
    • अमेरिकी विमान का मलबा: जवाब में, ईरान ने भी सोशल मीडिया पर एक अमेरिकी निगरानी विमान (Surveillance Aircraft) के मलबे की तस्वीरें साझा कर अपनी वायु रक्षा क्षमता का प्रदर्शन किया है।

    ईरान की ‘ग्लोबल सप्लाई चेन’ ठप करने की चेतावनी

    कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद ईरान का रुख सख्त बना हुआ है। ‘अल जजीरा’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजराइल ने अपनी कार्रवाई नहीं रोकी, तो ईरान केवल सैन्य जवाब नहीं देगा, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचाएगा।

    ईरान ने धमकी दी है कि वह न केवल होर्मुज स्ट्रेट, बल्कि बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री व्यापारिक रास्तों को भी निशाना बना सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा और व्यापार जगत में हड़कंप मच गया है।

    ट्रम्प का अल्टीमेटम और हूती विद्रोहियों का रुख

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस संकट पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को ‘होर्मुज स्ट्रेट’ तुरंत खोलने का अल्टीमेटम दिया है। ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि व्यापारिक रास्तों में बाधा डाली गई, तो अमेरिका बेहद विनाशकारी कदम उठाएगा। दूसरी ओर, ईरान के सहयोगी यमन के हूती विद्रोहियों ने पहले ही रेड सी (लाल सागर) में जहाजों पर हमले तेज करने की बात कही है, जिससे दबाव और बढ़ गया है।

    निष्कर्ष: अगले 48 घंटे निर्णायक

    अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ इस समय दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति से बचाने का आखिरी मौका हो सकता है। अगले 48 घंटों में यह साफ हो जाएगा कि ईरान और अमेरिका युद्ध के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे या शांति की मेज पर लौटेंगे।


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