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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर संग्राम: विपक्ष को घेरने के लिए भाजपा ने बनाया ‘जनता की अदालत’ का प्लान

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर संग्राम: विपक्ष को घेरने के लिए भाजपा ने बनाया ‘जनता की अदालत’ का प्लान
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भोपाल.
BDC News | bhopalonline.org

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लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) के पारित न हो पाने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को महिलाओं के अधिकारों के साथ ‘ऐतिहासिक अन्याय’ करार देते हुए कांग्रेस और विपक्षी दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा अब इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की व्यापक रणनीति तैयार कर चुकी है।

विधानसभा का विशेष सत्र और प्रदेशव्यापी आक्रोश रैली

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि इस गंभीर विषय पर चर्चा के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में जो हुआ वह लोकतंत्र के लिए निंदनीय है। उन्होंने घोषणा की कि सोमवार को प्रदेश भर में आक्रोश रैली निकाली जाएगी और बहनों को उनका अधिकार दिलाने के लिए भाजपा जिलों, संभागों और पंचायतों तक पदयात्राएं और रैलियां आयोजित करेगी।

महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक उदाहरण का हवाला

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के जमीनी उदाहरण पेश किए। उन्होंने गर्व से बताया कि मध्य प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ 17 महिला कलेक्टर और दिव्यांग संभागायुक्त कार्यरत हैं। राज्य के 10 से अधिक जिलों में कमान महिला एसपी और कलेक्टरों के हाथ में है। सीएम ने एक ऐसे संभाग का भी जिक्र किया जहाँ संभागायुक्त से लेकर जनपद पंचायत अध्यक्ष तक सभी पदों पर महिलाएं काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल केवल राजनीति कर रहे हैं, जबकि भाजपा जमीन पर महिलाओं को अधिकार दे रही है।

आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया और जनगणना का पेंच

विधेयक के लागू होने की समयसीमा पर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि महिलाओं को आरक्षण 2029 तक मिल जाएगा। इसके लिए जनगणना को आधार बनाना आवश्यक था। डॉ. यादव के अनुसार, यदि वर्तमान या नई जनगणना का इंतजार किया जाता, तो यह प्रक्रिया 2034 के बाद ही संभव हो पाती, इसलिए 2011 की जनगणना को आधार बनाकर जल्द से जल्द अधिकार देने का प्रयास किया गया। उन्होंने विपक्ष के विरोध को सरासर अवसरवाद करार दिया।

70 वर्षों का संघर्ष और विपक्ष की ‘महिला विरोधी’ मानसिकता

भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी विपक्ष पर तीखे प्रहार किए। रेखा वर्मा ने कहा कि देश की आधी आबादी पिछले 70 सालों से 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया। वहीं, हेमंत खंडेलवाल ने सीधे तौर पर राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि बिल गिरने पर जश्न मनाना देश की नारी शक्ति का अपमान है। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि नगरीय निकायों और पंचायतों में भी इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर विपक्ष की असलियत जनता को बताई जाएगी।


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