बारूद की ढेर की शिफ्टिंग कब!
भोपाल:
BDC News | bhopalonline.org
भोपाल में टिंबर मार्केट एक बार फिर भीषण आग की चपेट में आ गया। रविवार दोपहर करीब 2 बजे बरखेड़ी ऑटो स्टैंड के पास स्थित एक लकड़ी की दुकान में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते लपटें इतनी विकराल हो गईं कि करीब 20 फीट की ऊंचाई तक आग का गुबार उठने लगा। घटना के वक्त दुकान के ठीक पीछे मौजूद रेलवे ट्रैक से ट्रेनें गुजरती रहीं, जिससे रेल यातायात और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी काफी देर तक दहशत का माहौल बना रहा।
शॉर्ट सर्किट के कारण फैली आग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने का प्राथमिक कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। आग की वजह से दुकान के टीन शेड पर करंट फैल गया था, जिसके बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर बिजली का कनेक्शन काटा। राहत कार्य के दौरान दमकल विभाग को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में एक दमकल गाड़ी का नोजल खराब होने और पाइप सही से न लग पाने के कारण आग बुझाने में देरी हुई। तेज हवाओं ने आग को और भड़का दिया, जिस पर काबू पाने में दमकल कर्मियों को करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
मेट्रो प्रोजेक्ट और शिफ्टिंग के दौरान हादसा
हैरानी की बात यह है कि जिस दुकान में रविवार को आग लगी, उसे मेट्रो प्रोजेक्ट के चलते शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही थी। भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट में अड़चन बन रहे इस मार्केट को शिफ्ट करने की कवायद पिछले डेढ़ साल से चल रही है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण यह अब भी शहर के बीचों-बीच बना हुआ है। शिफ्टिंग की प्रक्रिया के बीच हुए इस हादसे ने एक बार फिर मार्केट की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘बारूद के ढेर’ पर बैठा शहर का मध्य क्षेत्र
पातरा पुल इलाके में स्थित यह टिंबर मार्केट, जिसमें 108 आरा मशीनें संचालित हैं, शहर के लिए किसी ‘बारूद के ढेर’ से कम नहीं है। प्रशासन द्वारा 18 एकड़ जमीन और 5.85 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किए जाने के बावजूद अब तक व्यापारियों का स्थानांतरण नहीं हो सका है। रविवार रात भी इसी इलाके की 6 आरा मशीनें जलकर खाक हो गईं, जिससे व्यापारियों को ढाई करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। रेलवे ट्रैक से सटा होने के कारण आग लगने पर ट्रेनों को भी अत्यधिक सावधानी के साथ धीमी गति से निकाला गया।
हादसों का पुराना इतिहास, फिर भी सबक नदारद
यह पहली बार नहीं है जब टिंबर मार्केट में इस तरह की भयावह स्थिति बनी हो। इससे पहले साल 2016 में भी यहां भीषण आग लगी थी, जिसे बुझाने के लिए 36 दमकलों को 4 घंटे तक संघर्ष करना पड़ा था। पिछले साल भी ऐसी ही घटना सामने आई थी। बार-बार होने वाले इन हादसों के बावजूद शिफ्टिंग की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के बीच लगातार डर और असुरक्षा का माहौल बना रहता है।
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