पेरिस।
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अमेरिका-ईरान शांति समझौता: ट्रम्प और पजशकियान ने MoU पर किए हस्ताक्षर
दुनिया का सुकून देने वाली खबर है… अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और युद्ध की स्थिति को खत्म करने के लिए एक ऐतिहासिक अंतरिम समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मध्यस्थता में, पेरिस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस दस्तावेज पर दस्तखत किए। इसके कुछ ही समय बाद, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से समझौते को अपनी मंजूरी दी।
भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 5 बजे से यह समझौता प्रभावी हो गया है। इस समझौते के साथ ही ईरान और लेबनान में जारी संघर्ष को समाप्त करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
समझौते के मुख्य बिंदु और शर्तें
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस शांति समझौते में कुल 14 प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है-
- युद्धविराम: ईरान और लेबनान में जारी सैन्य संघर्ष को तत्काल प्रभाव से समाप्त करना।
- होर्मुज स्ट्रेट: ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को दोबारा खोलना और अमेरिका द्वारा वहां से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना।
- प्रतिबंधों में राहत: तेल निर्यात और जमे हुए ईरानी फंड्स जारी करने जैसे मुद्दों पर सहमति।
- परमाणु कार्यक्रम: ईरान का अपने परमाणु हथियार बनाने के प्रयासों को रोकना।
ट्रम्प का दावा और वेंस की सफाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस समझौते को अपनी बड़ी जीत करार दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सभी लक्ष्य—युद्ध को रोकना, होर्मुज स्ट्रेट को खोलना और ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखना—पूरे हो गए हैं। साथ ही, ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य बल का प्रयोग करेगा। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि ईरान को 300 अरब डॉलर का कोई पैकेज नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान के भविष्य के कदम ही तय करेंगे कि उसे निवेश का लाभ मिलेगा या नहीं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और विपक्ष का विरोध
- चीन: चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सभी पक्षों से युद्धविराम का सम्मान करने की अपील की है और ईरान तथा लेबनान को मानवीय सहायता देने का वादा किया है।
- अमेरिकी विपक्ष: अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने इस समझौते की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे “अमेरिका की सबसे बड़ी राजनीतिक गलतियों में से एक” बताते हुए आरोप लगाया कि ट्रम्प ने ईरान के सामने ‘सरेंडर’ कर दिया है।
- पाकिस्तान और कतर: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पुष्टि की है कि 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक समारोह आयोजित किया जाएगा, जहां तकनीकी स्तर की वार्ताएं शुरू होंगी।
ऐतिहासिक वर्साय पैलेस का महत्व
यह समझौता ऐसे स्थान पर हुआ है जो स्वयं इतिहास का गवाह रहा है। वर्साय पैलेस, जो फ्रांसीसी राजशाही की शक्ति का प्रतीक है, 1919 में प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद वर्साय की संधि का केंद्र बना था। एक बार फिर, इस महल ने विश्व शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखा है।
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