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समाजसेवियों को सिद्धभाऊ की सीख सेवा करते हुए अपेक्षा कभी न रखें

समाजसेवियों को सिद्धभाऊ की सीख सेवा करते हुए अपेक्षा कभी न रखें
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हिरदाराम नगर। BDC NEWS
भावना से सेवा करें, सेवा के क्षेत्र में अपेक्षा न रखें। सेवा से मन को शांति मिलती है। सेवा तभी सफल होती है, जब विनम्रता हो। यह संदेश संत सिद्धभाऊ ने अपने जन्म दिन पर बधाई देने आए समाजसेवियों को दिया।
कुटिया में समाजसेवियों के बीच बोलते हुए भाऊजी ने कहा कि जो दूसरों के लिए के ईश्वर की प्रार्थना करता है, ईश्वर उसका भला करता है। मानव होकर मानवता से प्यार निभाना ही हमारा धर्म होना चाहिए। समाजसेवी को कभी कोई अपेक्षा किसी ने नहीं रखना चाहिए, क्या बेहतर कर सकते हैं यह सोचना चाहिए और करना चाहिए। मानव के साथ प्रकृति, पशु-पक्षी सभी की सेवा करना चाहिए। सेवा तभी सफल होती है, जब विनम्रता हो। चाहे छोटा हो, चाहे बड़ा हो सभी के प्रति विनम्रता का भाव होना चाहिए।
माता-पिता सम्मान करें
भाऊजी ने कहा कि माता-पिता की सेवा ही परमात्मा की पूजा है। माता-पिता के प्रति सम्मान का भाव रहना चाहिए। माता-पिता का तनाव महसूस करना चाहिए। सुपात्र संतान वही होती है, जिसमें माता-पिता का कष्ट महसूस करने की क्षमता हो।
निष्काम भाव से सेवा करें
निष्काम भाव से काम करें भगवान आपका साथ देगा। क्षमा गरीबी, बंदगी से जीवन सफल होता है। किसी का क्षमा करना महानता है, यह गुण होना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाएं, पैसा नहीं दें। बच्चा जब सो कर उठे तो उसके माथे को चूमे वह अच्छे रास्ते पर जाएगा।

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