रवि नाथानी।
BDC News | bhopalonline.org
आज के दौर में जहाँ नवविवाहित जोड़े शादी के बाद हनीमून के लिए विदेशों और चकाचौंध भरी दुनिया का रुख करते हैं, वहीं सिंधी समाज के नीलेश और सोनिया राजानी ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसे सुनकर हर कोई दंग है. यह दंपत्ति सनातन धर्म की ध्वजा थामे 12 ज्योतिर्लिंगों की 11,600 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा पर निकला है. अहमदाबाद से शुरू हुई इस यात्रा के जरिए राजानी परिवार न केवल सिंधी संस्कृति का सनातन धर्म से गहरा नाता दिखा रहा है, बल्कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और धार्मिक विरासत की ओर लौटने का संदेश भी दे रहा है. कठिन रास्तों और हादसों के बावजूद अटूट हौसले के साथ बढ़ते इस कपल की कहानी भक्ति और समर्पण की एक नई गाथा लिख रही है. BDC News ने विशेष बातचीत की….
- आप इस समय 12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर हैं, इसके पीछे आपका मुख्य उद्देश्य क्या है और यह विचार कैसे आया?
इस यात्रा के पीछे हमारा सबसे बड़ा उद्देश्य सिंधी संस्कृति और सनातन धर्म के गहरे जुड़ाव को दिखाना है। अक्सर सिंधी कम्युनिटी पर यह टिप्पणी की जाती है कि क्या वे सनातन धर्म से जुड़े हैं? हमें गर्व है कि हम भारत के पहले ऐसे दंपत्ति हैं जो सनातन धर्म की इतनी बड़ी ऐतिहासिक यात्रा पैदल कर रहे हैं। हम यह बताना चाहते हैं कि सिंधी समाज सनातन धर्म से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है।
- प्रश्न: अब तक आपने कितनी दूरी तय की है और किन स्थानों के दर्शन कर लिए हैं?
सोनिया राजानी: हमने 23 जुलाई से अहमदाबाद (गुजरात) से अपनी यात्रा शुरू की थी। अब तक हमने 11 राज्यों में 8,900 किलोमीटर से ज्यादा की पैदल दूरी तय कर ली है। इस दौरान हमने आठ ज्योतिर्लिंग, पांच शक्तिपीठ और दो धामों के दर्शन पूरे किए हैं। पूरी यात्रा लगभग 11,600 किलोमीटर की होगी।
प्रश्न: आज के युवा कपल्स के लिए आपकी इस यात्रा में क्या संदेश छिपा है?
आजकल के नए जोड़ों को विदेशों और क्लबों की पूरी जानकारी होती है, लेकिन वे अपनी धार्मिक विरासत (जैसे 12 ज्योतिर्लिंग) के बारे में कम जानते हैं। जब लोग हमसे मिलते हैं, तो उन्हें प्रेरणा मिलती है कि वे भी दर्शन के लिए निकलें। साथ ही, आजकल बढ़ती धोखाधड़ी और आपसी मनमुटाव के दौर में हम यह संदेश देना चाहते हैं कि यदि पति-पत्नी का निश्चय एक हो और सच्चा प्रेम साथ हो, तो वे पूरा भारत पैदल चल सकते हैं और कुछ भी हासिल कर सकते हैं।
- आपकी यात्रा के दौरान एक दुर्घटना भी हुई थी, उसके बारे में बताएं?
जी, हमने पहले 8 जुलाई को सोमनाथ की ओर से यात्रा शुरू की थी। लेकिन 10 जुलाई को एक छोटे बच्चे की जान बचाते समय हमारा एक्सीडेंट हो गया था। उस समय हम घर से मात्र 78 किलोमीटर ही चले थे। इसके बाद हमने अपना रूट बदला और 23 जुलाई से नए सिरे से यात्रा की शुरुआत की।
- शादी के बाद अक्सर लोग विदेश जाने का सपना देखते हैं, लेकिन आपने तीर्थयात्रा चुनी। यह तालमेल कैसे बैठा?
विचार मेरा था और सोनिया ने इसमें मेरा पूरा साथ दिया। सोनिया राजानी: हम 2019 से ही इस यात्रा पर जाना चाहते थे, लेकिन उस समय हमारी शादी नहीं हुई थी। शादी होने के बाद हमने तुरंत इसे पूरा करने का फैसला लिया।
- यह यात्रा कहाँ समाप्त होगी और इसमें कितना समय और लगेगा?
यात्रा की शुरुआत प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ (गुजरात) के क्षेत्र से हुई और इसका समापन रामेश्वरम में होगा। हमें उम्मीद है कि इसे पूरा करने में अभी चार से पांच महीने का समय और लगेगा।
पूज्य सिंधी पंचायत संतनगर के रविवार को राजानी दंपति का स्वागत किया। स्वागत समारोह शांतिप्रकाश धर्मशाला में आयोजित किया गया, जिसमें सिंधी समाज के विशिष्ठजन मौजूद रहे।

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