धर्म डेस्क।BDC News|bhopalonline.org
वर्ष 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगने जा रहा है। यह कोई सामान्य ग्रहण नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों के अनुसार, यह इस सदी के सबसे लंबे पूर्ण चंद्र ग्रहणों (Total Lunar Eclipse) में से एक होगा। जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच इस तरह आती है कि चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में छिप जाता है, तो उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा का रंग गहरा लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है, जिसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को लग रहा है, जो इसे आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से और भी प्रभावशाली बनाता है।
चंद्र ग्रहण 2026 का समय और दृश्यता
3 मार्च 2026 को होने वाला यह चंद्र ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार, ग्रहण की शुरुआत दोपहर के बाद होगी और इसका मोक्ष काल शाम को होगा। हालांकि, भारत में इसकी दृश्यता आंशिक हो सकती है, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 5 घंटे से अधिक होगी, जिसमें पूर्णता की स्थिति (Totality) काफी लंबे समय तक बनी रहेगी। लंबी अवधि होने के कारण खगोल प्रेमियों के लिए यह एक दुर्लभ अवसर होगा।
सूतक काल के नियम और सावधानियां
शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है। चूंकि यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण है, इसलिए इसके सूतक काल के नियमों का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
- भोजन और जल: सूतक काल में भोजन पकाने और खाने से परहेज करना चाहिए। दूध, दही और जल जैसे तरल पदार्थों में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए ताकि वे दूषित न हों।
- गर्भवती महिलाएं: इस दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें नुकीली वस्तुओं जैसे सुई, चाकू या कैंची का उपयोग नहीं करना चाहिए और घर के भीतर ही रहना चाहिए।
- मंत्र जाप: ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
इन 3 भाग्यशाली राशियों की चमकेगी किस्मत
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर ग्रहण का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है। लेकिन 3 मार्च का यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगने जा रहा है, जिससे कुछ विशेष राशियों के लिए उन्नति के द्वार खुलेंगे:
- मेष राशि (Aries): मेष राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण वरदान साबित हो सकता है। आपके लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होंगे। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और निवेश से लाभ मिलने के प्रबल योग हैं। कार्यक्षेत्र में आपके प्रदर्शन की सराहना होगी और पदोन्नति की संभावनाएं बनेंगी।
- सिंह राशि (Leo): चूंकि ग्रहण इसी राशि में लग रहा है, इसलिए सिंह राशि वालों के लिए यह बड़े बदलाव का समय है। आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। जो लोग राजनीति या प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े हैं, उन्हें बड़ी सफलता मिल सकती है। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और नया व्यापार शुरू करने के लिए समय उत्तम है।
- धनु राशि (Sagittarius): धनु राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण भाग्य में वृद्धि करने वाला रहेगा। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रहेगा, उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है।
सावधानी बरतने वाली राशियां
जहां कुछ राशियों के लिए यह शुभ है, वहीं वृषभ, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों को इस दौरान थोड़ा संभलकर रहने की आवश्यकता है। उन्हें वाद-विवाद से बचना चाहिए और स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना चाहिए। ग्रहण के बाद सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चीनी या चावल का दान करना इन राशियों के लिए शुभ रहेगा।
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है जो पृथ्वी के वायुमंडल और प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering) को समझने में मदद करती है। वहीं, आध्यात्मिक रूप से इसे आत्म-चिंतन और ध्यान का समय माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान किया गया दान और जप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल प्रदान करता है।
निष्कर्ष
3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण न केवल आसमान में एक सुंदर नजारा पेश करेगा, बल्कि हमारे जीवन में बड़े बदलाव भी लेकर आएगा। चाहे आप विज्ञान में विश्वास रखते हों या ज्योतिष में, इस घटना की भव्यता और इसके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सूतक काल के नियमों का पालन करते हुए इस समय का सदुपयोग आध्यात्मिक उन्नति के लिए करना चाहिए।
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