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ईद-उल-अजहा : ताज-उल-मसाजिद में अदा की गई नमाज़, मुल्क में अमन-ओ-अमान के लिए उठे हजारों हाथ

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भोपाल.
BDC News | bhopalonline.org

राजधानी में ईश-आस्था और अक़ीदत का पाक त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) आज गुरुवार को बेहद पुरअमन, पुरखुलूस और भाईचारे के माहौल में मनाया जा रहा है। सुबह की पहली किरण के साथ ही एशिया की अजीम-ओ-शान मस्जिदों में शुमार ‘ताज-उल-मसाजिद’ समेत शहर की 56 नुमायां (प्रमुख) मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज़-ए-ईद के लिए अक़ीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। खुदा की बारगाह में सजदा करने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की दिली मुबारकबाद पेश की और मुल्क व सूबे (प्रदेश) की खुशहाली, तरक्की और अमन-चैन के लिए गिड़गिड़ाकर दुआएं मांगीं।

ताज-उल-मसाजिद में रूहानी समां: इमाम साहब ने दिया इत्तेहाद और मोहब्बत का पैगाम

राजधानी के मरकज़ ताज-उल-मसाजिद में ईद की विशेष नमाज़ का एहतमाम (आयोजन) हुआ, जिसमें हजारों की तादाद में नमाज़ियों ने शिरकत की। नमाज़ मुकम्मल होने के बाद आली जनाब इमाम साहब ने खुतबा पढ़ा और समाज में इत्तेहाद (एकता), भाईचारे और इंसाफ को कायम रखने की पुरअसर दुआ कराई। उन्होंने अपनी तकरीर में फरमाया कि किसी भी माशरे (समाज) की बुनियाद और मजबूती आपसी मोहब्बत, रवादारी (सद्भाव) और हमदर्दी के जज्बे से ही मुमकिन है। इस मख़सूस (विशेष) दुआ में सरहद की हिफाज़त, युवाओं के रोजगार, मरीजों की शिफा (स्वास्थ्य लाभ) और मुफ़लिसों (जरूरतमंदों) की मुश्किलात दूर होने की खास इल्तेजा (कामना) की गई।

मजहबी रस्मों के साथ समाजी जिम्मेदारी का पैगाम

इस मुकद्दस मौके पर मुख्तलिफ मजहबी तंजीमों (धार्मिक संगठनों) और वक्फ बोर्ड ने अवाम से त्योहार को पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ मनाने की गुजारिश की है। उलेमा-ए-किराम ने अपील की कि सुन्नत-ए-इब्राहिमी (कुर्बानी) की पाकीज़ा रस्म को मजहबी रिवायत और सरकारी कवानिन (प्रशासनिक नियमों) के दायरे में रहकर ही अंजाम दिया जाए। इसके साथ ही, पड़ोसियों की सहूलियत का ख्याल रखने और अपने आसपास के माहौल को पाक-साफ (स्वच्छ) रखने पर विशेष जोर दिया गया।

सोशल मीडिया पर कुर्बानी के वीडियो व तस्वीरें शेयर न करने की सख्त हिदायत

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने इस मर्तबा सोशल मीडिया के संजीदा इस्तेमाल को लेकर खुसूसी (विशेष) हिदायत जारी की है। बोर्ड ने पुरजोर अपील की है कि कुर्बानी से जुड़े फोटो या वीडियो किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा (शेयर) न किए जाएं। मजहबी कद्रों (धार्मिक गरिमा) की पासादारी करने और समाजी सौहार्द (मिल्लत) के ताने-बाने को मजबूत रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। बोर्ड का मानना है कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो नशर (प्रसारित) करने से बिलावजह के तनाज़े (विवाद) पैदा हो सकते हैं, लिहाजा हर फर्द (व्यक्ति) को सब्र और समझदारी का मुजाहिरा करना चाहिए।

तयशुदा मकामात पर ही होगी कुर्बानी; नगर निगम के साथ तालमेल

हुक्मनामे (दिशानिर्देशों) के मुताबिक, कुर्बानी केवल उन्हीं मकामात (स्थानों) पर करने की इजाजत है जो प्रशासन द्वारा चिन्हित और निर्धारित किए गए हैं। ऐसे तमाम मुकर्रर स्थानों को चारों तरफ से कनात या पर्दों से ढंकने का बंदोबस्त करने को कहा गया है। इसके अलावा, कुर्बानी के बाद बचे हुए अपशिष्ट (वेस्ट) का वैज्ञानिक और शरिअत के तौर-तरीकों से निस्तारण करने तथा गंदगी से बचने के लिए नगर निगम के सफाई दलों के साथ राब्ता (समन्वय) कायम रखने के निर्देश दिए गए हैं।

इंतजामिया और पुलिस महकमा अलर्ट मोड पर; बाजारों में बढ़ी रौनक

ईद के पुरमसर्रत (खुशनुमा) मौके पर राजधानी में जिला प्रशासन, पुलिस महकमे और बलदिया (नगर निगम) की जानिब से चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों और इबादतगाहों के इर्द-गिर्द हिफाजती दस्ते (सुरक्षा बल) तैनात रहे, वहीं सफाई अमला भी पूरी मुस्तैदी से काम में जुटा रहा। नमाज़ से फारिग होकर अकीदतमंदों ने अपने अजीजों और रिश्तेदारों के घर जाकर लजीज पकवानों और सेवइयों का लुत्फ उठाया और एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी।

शहर काजी की अपील: “अपनी हैसियत के मुताबिक करें कुर्बानी, गरीबों का रखें खास ख्याल”

मशहूर मजहबी रहनुमा और शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी साहब ने अवाम के नाम एक अहम पैगाम जारी किया है। उन्होंने फरमाया कि साहिब-ए-हैसियत (सक्षम) लोग खुदा की राह में उम्दा और अच्छी कुर्बानी पेश करें, लेकिन इस बात का खास ख्याल रखें कि इसके गोश्त का एक हिस्सा यानी ‘तबर्रुक’ गरीबों, यतीमों और बेसहारा लोगों तक लाजिमी तौर पर पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने तहारत (साफ-सफाई) का पूरा एहतमाम करने, गंदगी को सिर्फ नगर निगम के कूड़ेदानों में ही डालने और सोशल मीडिया पर तस्वीरें या रील न बनाने की सख्त ताकीद (हिदायत) की है।



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