भोपाल।
BDC News | bhopalonline.org
“मैं शहर की कंक्रीट वाली सड़कों के बीच खामोश खड़ा एक पेड़ हूँ। सालों से मेरी जड़ों पर सीमेंट की भारी परतें चढ़ाकर मेरा दम घोंटा जा रहा था। न प्यास बुझाने के लिए पानी पहुँचता था, न जड़ों को साँस लेने के लिए हवा मिलती थी। लेकिन अब, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) मेरे लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है।” भोपाल में पर्यावरण के प्रति एक ऐतिहासिक संवेदनशीलता दिखाते हुए एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ ने प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि अब किसी भी पेड़ का गला कंक्रीट से नहीं घोंटा जाएगा।
“मुझे भी चाहिए साँस लेने की जगह”
न्यायमूर्ति शियो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने अवधपुरी के बाबूलाल गौर मार्ग का हवाला देते हुए कहा कि पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट करना उनकी हत्या करने जैसा है। एनजीटी ने स्पष्ट आदेश दिया है कि हर पेड़ के चारों ओर कम से कम एक मीटर का घेरा मिट्टी के लिए खाली रखना अनिवार्य होगा। उसके शरीर (तने) पर ठोंके गए विज्ञापन बोर्ड, कीलें और बिजली के तारों को तुरंत हटाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण में जीना अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक (और अप्रत्यक्ष रूप से प्रकृति) का मौलिक अधिकार है।
बीमार पेड़ों के लिए बनेगा ‘अस्पताल’
पर्यावरणविदों के दो साल के लंबे संघर्ष के बाद, अब नगर निगम को ‘ट्री डिजीज सर्जरी यूनिट’ स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। यह उन पेड़ों के लिए एक वरदान साबित होगा जो संक्रमण या चोट के कारण दम तोड़ रहे हैं। अब पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई जैसी संस्थाओं को विकास के साथ-साथ मेरे अस्तित्व का भी ध्यान रखना होगा।
लहारपुर डैम की सिसकियाँ: “जहरीला हो रहा है मेरा पानी”
पेड़ों के साथ-साथ एनजीटी ने बाग मुगालिया स्थित लहारपुर डैम के दर्द को भी समझा है। एक रिपोर्ट में सामने आया कि बिना उपचारित सीवेज मिलने से डैम का पानी काला और दुर्गंधयुक्त हो चुका है। एनजीटी ने इसे जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बताया है क्योंक: इसी दूषित पानी से 2,500 एकड़ कृषि भूमि सींची जा रही है, जो सीधे हमारी थाली तक जहर पहुँचा रही है। नगर निगम को उन सभी नालों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं जो सीधे डैम में जहर उगल रहे हैं। जल संसाधन विभाग अब डैम के चारों ओर एक ‘ग्रीन बेल्ट’ विकसित करेगा, ताकि जल स्रोत को सुरक्षा मिल सके।
प्रशासन को अब यह करना होगा
एनजीटी ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नियमित निगरानी के आदेश दिए हैं। साथ ही, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित करने की समय सीमा तय की है। अब समय आ गया है कि भोपाल की झीलें और पेड़ विकास की भेंट चढ़ने के बजाय शहर के फेफड़ों के रूप में सुरक्षित रहें।
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