महिला आरक्षण बिल पर प्रधानमंत्री का संबोधन
नई दिल्ली।
BDC News | bhopalonline.org
लोकसभा में में महिला आरक्षण से जुड़ा ‘संविधान (131वां संशोधन) बिल’ गिर जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित किया। अपने 30 मिनट के भाषण में पीएम ने भावुक और आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि वे सभी माताओं-बहनों से क्षमा मांगते हैं क्योंकि यह संशोधन पारित नहीं हो सका। उन्होंने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब दलगत स्वार्थ देशहित से बड़े हो जाते हैं, तो उसका खामियाजा नारी शक्ति को भुगतना पड़ता है।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों को इस ‘राजनीतिक भ्रूणहत्या’ का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, लेकिन दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) न मिल पाने के कारण यह ऐतिहासिक अवसर हाथ से निकल गया। पीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने आधी आबादी के हक को छीना है, उन्हें इस पाप की सजा आने वाले समय में जरूर मिलेगी।
मोदी की 10 बड़ी बातें (Breaking Highlights)
- सपनों का दमन: पीएम ने कहा कि आज पूरा भारत देख रहा है कि कैसे नारी शक्ति की उड़ान को विपक्ष ने बेरहमी से कुचल दिया है।
- संसद में जश्न पर प्रहार: बिल गिरने पर विपक्षी दलों द्वारा मेजें थपथपाने और तालियां बजाने को पीएम ने करोड़ों महिलाओं के स्वाभिमान पर चोट बताया।
- अपमान का हिसाब: प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि नारी सब कुछ भूल सकती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती; विपक्ष का यह व्यवहार इतिहास में दर्ज हो गया है।
- असुरक्षित परिवारवाद: उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारवादी पार्टियां महिलाओं के बढ़ते कद से डरी हुई हैं, इसलिए उन्होंने परिसीमन और आरक्षण का विरोध किया।
- कुतर्कों का जाल: पीएम के अनुसार, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल दशकों से तकनीकी बहाने बनाकर महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालते रहे हैं।
- सुधारों में बाधा: भाषण में कहा गया कि कांग्रेस ने हमेशा महत्वपूर्ण सुधारों को लटकाए रखा, जिसका नतीजा है कि कई पड़ोसी देश हमसे आगे निकल गए।
- विभाजन की राजनीति: परिसीमन पर भ्रम फैलाने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष इसके बहाने देश में विभाजन की आग सुलगाना चाहता है।
- प्रतिनिधित्व की गारंटी: सरकार ने साफ किया है कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा, फिर भी विपक्षी दल झूठ फैलाने में जुटे हैं।
- अटूट संकल्प: पीएम ने स्पष्ट किया कि संख्याबल की कमी से मिशन रुका नहीं है; सरकार हर बाधा हटाकर महिलाओं को उनका हक दिलाकर रहेगी।
- वक्त का इंतजार: संबोधन का अंत इस भरोसे के साथ हुआ कि हम हारे नहीं हैं, बस सही वक्त का इंतजार है। कोशिशें जारी रहेंगी और जीत नारी शक्ति की ही होगी।
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