नई दिल्ली:
BDC News | bhopalonline.org
भारतीय रेलवे अपने दशकों पुराने बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में रेलवे के यात्री आरक्षण सिस्टम (PRS) को पूरी तरह से बदलने यानी ‘मेगा अपग्रेड’ की घोषणा की है। 1986 के दौर की तकनीक पर आधारित वर्तमान सिस्टम को अलविदा कहकर अब भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक नया और सुपरफास्ट डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।
1986 की तकनीक से भविष्य के सफर तक
भारतीय रेलवे का वर्तमान पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पिछले लगभग 40 वर्षों से सेवा में है। हालांकि समय-समय पर इसमें छोटे-मोटे तकनीकी सुधार (पैचवर्क) किए गए, लेकिन बढ़ती आबादी और डिजिटल मांग के कारण अब यह सिस्टम अपनी सीमा तक पहुंच चुका है। रेल मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि अब पैचवर्क के बजाय पूरे सिस्टम को ‘स्क्रैच’ से रिबिल्ड किया जाएगा। इस नए सिस्टम को नई पीढ़ी की क्लाउड तकनीक और हाई-प्रोसेसिंग पावर के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि यात्रियों को टिकट बुक करते समय ‘हैंग’ होने या ‘टाइम आउट’ जैसी समस्याओं से न जूझना पड़े।
टिकट खिड़की से ‘RailOne’ ऐप तक का क्रांतिकारी बदलाव
रेलवे के आंकड़ों पर गौर करें तो यात्रियों के व्यवहार में एक बड़ा डिजिटल शिफ्ट देखने को मिला है। साल 2002 में शुरू हुई इंटरनेट बुकिंग आज रेलवे की मुख्य रीढ़ बन चुकी है। वर्तमान में देश की कुल 88% टिकट बुकिंग ऑनलाइन माध्यमों से हो रही है, जबकि रेलवे काउंटरों (टिकट खिड़कियों) पर निर्भरता अब नाममात्र रह गई है। इसी डिजिटल क्रांति को गति देने के लिए लॉन्च किए गए ‘RailOne’ ऐप ने महज एक साल में 3.5 करोड़ डाउनलोड्स का कीर्तिमान स्थापित किया है। यह ऐप अब आरक्षित और अनारक्षित दोनों तरह की टिकटों के लिए यात्रियों की पहली पसंद बन गया है।
RailOne ऐप: सफलता के कुछ शानदार आंकड़े
पिछले साल जुलाई में लॉन्च हुए ‘RailOne’ ऐप ने रेलवे के डिजिटल सफर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। गूगल प्ले स्टोर पर इसके 3.16 करोड़ और एप्पल स्टोर पर 33.17 लाख से अधिक डाउनलोड्स हो चुके हैं। ऐप की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रोजाना करीब 9.29 लाख टिकट इसके माध्यम से बुक किए जा रहे हैं। इसमें प्रतिदिन 7.2 लाख अनारक्षित (जनरल/प्लेटफॉर्म) टिकट और 2.09 लाख आरक्षित टिकटों का बड़ा आंकड़ा शामिल है। यह ऐप न केवल टिकट बुकिंग, बल्कि रियल-टाइम ट्रेन स्टेटस और त्वरित शिकायत निवारण के लिए भी ‘वन-स्टॉप सॉल्यूशन’ साबित हो रहा है।
क्या होगा इस ‘मेगा अपग्रेड’ का लाभ?
नए तकनीकी परिवर्तन का सबसे बड़ा उद्देश्य यात्रियों को ‘सीमलेस’ (निर्बाध) अनुभव प्रदान करना है। नए सिस्टम की प्रोसेसिंग क्षमता इतनी अधिक होगी कि ‘तत्काल’ बुकिंग जैसे पीक आवर्स के दौरान भी लाखों यात्री एक साथ बिना किसी तकनीकी बाधा के टिकट बुक कर सकेंगे। इसके अलावा, डेटा माइग्रेशन और नई सुरक्षा परतों के कारण टिकट बुकिंग पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हो जाएगी। इससे बिचौलियों और अवैध सॉफ्टवेयरों के जरिए होने वाली धांधली पर भी लगाम कसने में मदद मिलेगी।
रेल मंत्री का ‘ज़ीरो डिस्रप्शन’ का सख्त निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि इस तकनीकी बदलाव के दौरान यात्रियों को रत्ती भर भी असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा अपग्रेडेशन बैकएंड पर होना चाहिए और फ्रंटएंड (यात्री इंटरफेस) पर काम सुचारू रूप से चलता रहे। उन्होंने सिस्टम की टेस्टिंग और पुराने डेटा को नए सिस्टम में ट्रांसफर (डेटा माइग्रेशन) करने की प्रक्रिया को बेहद सावधानी से और बिना किसी ‘डाउनटाइम’ के पूरा करने पर जोर दिया है।
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