होर्मुज को लेकर छिड़ा जुबानी जंग
वॉशिंगटन/तेहरान।
BDC News| bhopalonline.org
मध्य-पूर्व (Middle East) में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को लेकर बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शनिवार को ‘एयरफोर्स वन’ विमान में पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान के पास मौजूद उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम को जब्त या हासिल करेगा।
बुधवार तक की डेडलाइन: सीजफायर पर खतरा
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बुधवार तक किसी बड़े और ठोस समझौते पर सहमति नहीं बनती है, तो वर्तमान में जारी ‘सीजफायर’ (युद्धविराम) को खत्म माना जाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“ईरान को यह समझना होगा कि अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहेगी। यदि समझौता नहीं हुआ, तो हमारे पास फिर से बमबारी शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”
पाकिस्तान वार्ता की विफलता और बढ़ते मतभेद
हाल ही में पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत (Backchannel Diplomacy) हुई थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि यहाँ से कोई सकारात्मक रास्ता निकलेगा, लेकिन नतीजा सिफर रहा। वर्तमान में दोनों देश तीन प्रमुख बिंदुओं पर एक-दूसरे के सामने खड़े हैं:
- प्रतिबंधों का भविष्य: ईरान चाहता है कि बातचीत से पहले उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध तुरंत हटाए जाएं।
- परमाणु सीमा: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह सीमित करे और संवर्धित यूरेनियम सौंप दे।
- समुद्री सुरक्षा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य: गालिबाफ की जवाबी चेतावनी
ट्रंप के बयान के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी नाकेबंदी को चुनौती दी। गालिबाफ ने दो टूक कहा:
- यदि अमेरिका ने नाकेबंदी नहीं हटाई, तो होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को खुला रखना संभव नहीं होगा।
- वहाँ से गुजरने वाले किसी भी जहाज को ईरान की अनुमति लेनी होगी और केवल तय रूट का ही पालन करना होगा।
- उन्होंने चेतावनी दी कि समुद्री रास्ते के नियम ‘जमीनी हकीकत’ तय करेगी, न कि वाशिंगटन के दावे।
USCC का रुख: जब तक आदेश नहीं, नाकेबंदी नहीं हटेगी
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (USCC) ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। कमांड के अनुसार, जब तक राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से स्पष्ट निर्देश नहीं मिलते, ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप का मानना है कि ‘शांति समझौते’ पर हस्ताक्षर किए बिना ईरान को कोई ढील देना अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।
🏛️ BDC न्यूज़ व्यू: क्या दुनिया एक और युद्ध की दहलीज पर है?
BDC न्यूज़ विश्लेषण: ट्रंप और ईरान के बीच का यह ताजा वाकयुद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति के लिए खतरे की घंटी है। यदि ईरान होर्मुज की घेराबंदी करता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई बाधित होगी, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ट्रंप अपनी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (Maximum Pressure) पॉलिसी के जरिए ईरान को घुटनों पर लाना चाहते हैं, लेकिन ईरान का नेतृत्व भी झुकने को तैयार नहीं दिख रहा। यूरेनियम को हासिल करने की ट्रंप की जिद यह बताती है कि अमेरिका ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने के लिए सैन्य विकल्प (Military Option) का भी इस्तेमाल कर सकता है।
अगले 96 घंटे वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि बुधवार तक कोई बीच का रास्ता नहीं निकला, तो खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर बम धमाकों की गूंज सुनाई दे सकती है।