नई दिल्ली.
BDC News | bhopalonline.org
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए भूचाल ने भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव, विशेषकर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े संघर्ष ने ब्रेंट क्रूड को 125 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहाँ से दुनिया का 20% तेल व्यापार होता है, उसके बंद होने से आपूर्ति शृंखला पूरी तरह चरमरा गई है।
कीमतों में कितनी बढ़ोतरी की संभावना है?
बाजार विश्लेषकों और सरकारी सूत्रों के संकेतों को देखें तो भारत में ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी अब अपरिहार्य (Inevitable) नजर आ रही है…
- संभावित वृद्धि: जानकारों का मानना है कि तेल कंपनियां अपनी लागत की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दामों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा कर सकती हैं।
- कंपनियों का घाटा: वर्तमान में खुदरा कीमतें स्थिर होने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर ₹20 और डीजल पर ₹100 प्रति लीटर तक का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
- चुनावी गणित: माना जा रहा है कि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल चुनाव के अंतिम चरण के मतदान संपन्न होने के बाद सरकार इन नई दरों को हरी झंडी दे सकती है।
महंगाई का नया चक्र
यदि यह बढ़ोतरी लागू होती है, तो दिल्ली जैसे शहरों में पेट्रोल की कीमत 120 रुपये और डीजल 115 रुपये प्रति लीटर के पार जा सकता है। इसका सीधा असर माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ेगा, जिससे खाने-पीने की वस्तुओं समेत हर जरूरी सामान की कीमतों में उछाल आना तय है।
सरकार के पास क्या है विकल्प?
सरकार वर्तमान में इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) और रणनीतिक तेल भंडार के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन 114 डॉलर प्रति बैरल के औसत कच्चे तेल के दाम के सामने ये उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति वार्ता बहाल नहीं होती और आपूर्ति सुचारू नहीं की जाती, तो आम उपभोक्ताओं को अपनी जेब पर भारी बोझ के लिए तैयार रहना होगा।
सूत्रों के हवाले खबर….
पेट्रोल और डीजल की कीमतें ₹4-5 प्रति लीटर तक बढ़ानी पड़ सकती हैं. वहीं घरेलू LPG की कीमत ₹40-50 प्रति सिलेंडर तक बढ़ सकती हैं.
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