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    अध्यात्म का महासूर्य अस्त: स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज को सोमवार को दी जाएगी समाधि

    स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज
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    सतना (मध्य प्रदेश): BDC News|bhopalonline.org

    विंध्य क्षेत्र सहित संपूर्ण भारत के आध्यात्मिक जगत के लिए एक दुखद समाचार है। धारकुंडी आश्रम के संस्थापक और 102 वर्षीय संत परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज ब्रह्मलीन हो गए हैं। उनके निधन से पूरे विंध्य क्षेत्र और उनके लाखों अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई है। महाराज जी की पार्थिव देह आज रविवार को धारकुंडी आश्रम पहुंचेगी, जहाँ भक्त उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे। सोमवार को उन्हें पूर्ण वैदिक परंपराओं के साथ समाधि दी जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे अंतिम दर्शन

    स्वामी जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार दोपहर 3:40 बजे धारकुंडी आश्रम पहुंचेंगे। इसके अतिरिक्त, सांसद गणेश सिंह, विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार सहित कई राजनेताओं और गणमान्य व्यक्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

    मानव कल्याण के लिए समर्पित जीवन और साहित्यिक योगदान

    परमहंस सच्चिदानंद महाराज ने मात्र 22 वर्ष की आयु में ही संसार के मोह-माया का त्याग कर वैराग्य धारण कर लिया था。 उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन आध्यात्मिक उन्नति और जन-कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। महाराज जी एक महान विद्वान और लेखक भी थे।उन्होंने ‘मानस बोध’ और ‘गीता बोध’ जैसे कालजयी ग्रंथों की रचना की।आश्रम द्वारा उनके दिव्य प्रवचनों पर आधारित कई पुस्तकें भी प्रकाशित की गई हैं, जो साधकों का मार्ग प्रशस्त करती रहती हैं।

    स्वयं चुना समाधि स्थल: गर्भगृह में दी जाएगी भू-समाधि

    आश्रम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वामी जी ने अपने जीवनकाल में ही अपने समाधि स्थल का चयन कर लिया था。 उनकी पार्थिव काया को धारकुंडी आश्रम के गर्भगृह में ही समाधि दी जाएगी। इस कठिन समय में आश्रम के प्रमुख संत, जिनमें उनके गुरु भाई स्वामी अड़गड़ानंद महाराज, रामायण महाराज, वीरेंद्र कुमार महाराज और विजय महाराज शामिल हैं, आश्रम में उपस्थित हैं।

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    सुरक्षा के कड़े इंतजाम: 500 पुलिसकर्मी तैनात

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं। पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह के नेतृत्व में लगभग 500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।इसमें रीवा, सतना, जबलपुर और सागर के विभिन्न बटालियन के बल शामिल हैं。 रीवा और सतना से आने वाले वाहनों के लिए आश्रम से 5 किलोमीटर पहले धारकुंडी अस्पताल के पास पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है।

    धारकुंडी: अनादि काल से आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र

    धारकुंडी का अर्थ ‘जलधारा’ और ‘जलराशि’ के संगम से है। यह स्थान अनादि काल से ऋषियों और मुनियों की तपोभूमि रहा है। इसका संबंध पांडवों के वनवास काल से भी जोड़ा जाता है। अघमर्षन तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध इस स्थल पर आज भी श्रद्धालु कुंड में स्नान कर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं। स्वामी जी ने इसी प्राचीन ऊर्जा केंद्र को एक आधुनिक महातीर्थ के रूप में विकसित किया था。


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