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चढ़ावा चोरी : हाईकोर्ट में सुनवाई, सीबीआई जांच और कैग ऑडिट पर आ सकता है फैसला

चढ़ावा चोरी : हाईकोर्ट में सुनवाई, सीबीआई जांच और कैग ऑडिट पर आ सकता है फैसला
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हाईकोर्ट में दाखिल पीआईएल पर सुनवाई सोमवार को

लखनऊ। डिजिटल डेस्क
BDC NEWS|
bhopalonline.org

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दानपात्रों से चढ़ावा चोरी होने के गंभीर आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल एक जनहित याचिका (PIL) पर संभवतः सोमवार, 6 जुलाई को सुनवाई होने जा रही है। यह याचिका न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई है।

क्या है पूरा मामला?

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों में मिलने वाली नकदी, सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं के कथित गबन का मामला सामने आया है, जिसकी खबरें लगातार मीडिया में छाई हुई हैं। स्थानीय अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा व्यक्तिगत रूप से यह याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह मामला करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा है और इसके कारण भक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।

याचिका की मुख्य मांगें

जानिए याचिकाकर्ता ने निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट से क्या किया है आग्रह…

  • सीबीआई जांच: कथित गबन मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई (CBI) को सौंपने और इस संबंध में केस दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
  • कैग (CAG) द्वारा ऑडिट: मंदिर के दानपात्रों में प्राप्त चढ़ावे की संपत्ति का महालेखा परीक्षक नियंत्रक (CAG) के माध्यम से ऑडिट कराने की मांग की गई है।
  • पुलिस अधीक्षक स्तर की निगरानी: याचिका में यह भी मांग की गई है कि राज्य सरकार को निर्देश दिए जाएं कि इस मामले की तफ्तीश किसी पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में पूरी हो।

किन पक्षों को बनाया गया है प्रतिवादी?

इस जनहित याचिका में कई प्रमुख संस्थाओं और अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है, जिनमें केंद्र और राज्य सरकार, सतर्कता विभाग के प्रमुख सचिव, सीबीआई के निदेशक, कैग (CAG), और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (चेयरपर्सन के माध्यम से) शामिल हैं।

सुनवाई में देरी की पृष्ठभूमि

ज्ञात हो कि यह जनहित याचिका 12 जून को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल की गई थी। हालांकि, ग्रीष्मकालीन अवकाश और समय की कमी के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी थी। अब सभी पक्षों की नजरें 6 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी।



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