CEO की सफाई के बाद भी आक्रोश
भोपाल।
BDC News | bhopalonline.org
चश्मों की रिटेल चेन ‘लेंसकार्ट’ (Lenskart) के एक कथित ड्रेस कोड को लेकर छिड़ा विवाद अब सड़कों तक पहुँच गया है। भोपाल के न्यू मार्केट स्थित रोशनपुरा इलाके में हिंदू संगठनों ने शोरूम के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’ के बाद यह मामला गरमाया हुआ है, जिसे लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
शोरूम के बाहर नारेबाजी और कलावा अभियान
हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में शोरूम के बाहर एकत्रित होकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने एक अनूठा विरोध प्रदर्शन करते हुए शोरूम के कर्मचारियों को तिलक लगाया, मंत्रोच्चार किया और उन्हें कलावा (रक्षासूत्र) बांधा। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी प्रोफेशनल सेटिंग में धार्मिक प्रतीकों और आस्था का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बहिष्कार की चेतावनी और तीखा विरोध
हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बहिष्कार का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि तिलक, बिंदी और कलावा भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं और इन पर किसी भी तरह की रोक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि कॉरपोरेट कंपनियों को अपनी नीतियों में भारतीय धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करना होगा।
संत समाज ने जताई कड़ी आपत्ति
इस विवाद में अब संत समाज भी कूद पड़ा है। मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिल आनंद ने कहा कि महिलाओं के सिंदूर और कलावा जैसे पारंपरिक प्रतीकों पर रोक की खबरें दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने इसे सनातन परंपराओं पर प्रहार बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
क्या है विवाद की मुख्य जड़?
विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित ‘ग्रूमिंग गाइड’ के स्क्रीनशॉट से हुई। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि इस पॉलिसी में बिंदी, तिलक और कलावा पहनने पर पाबंदी की बात कही गई है, जबकि कुछ अन्य धार्मिक प्रतीकों को शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। शेफाली वैद्य समेत कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद ‘बॉयकॉट लेंसकार्ट’ जैसे ट्रेंड भी देखने को मिले।
CEO पीयूष बंसल ने पेश की सफाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए लेंसकार्ट के CEO पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने कहा कि कंपनी सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करती है। बंसल के अनुसार, कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है और कंपनी की नीतियों में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं है। हालांकि, प्रदर्शनकारी संगठन इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं और मामले में और अधिक स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
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