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    भोपाल के CM हाउस में लगी दुनिया की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, जानिए इसकी खासियतें

    भोपाल के CM हाउस में लगी दुनिया की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, जानिए इसकी खासियतें
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    भोपाल: BDC News

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री निवास में सोमवार, 1 सितंबर को एक ऐतिहासिक पहल हुई। सीएम हाउस भारत का पहला ऐसा सरकारी भवन बन गया है, जहां भारतीय काल गणना पर आधारित दुनिया की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। इस घड़ी और नवनिर्मित प्रवेश द्वार का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस अवसर पर एक विशेष ऐप भी लॉन्च किया गया, जिसमें 189 भाषाओं में इस घड़ी की जानकारी दी गई है।

    क्या है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी?

    इस वैदिक घड़ी का निर्माण लखनऊ की संस्था ‘आरोहण’ ने आरोह श्रीवास्तव के नेतृत्व में किया है। यह घड़ी जीएमटी (GMT) के 24 घंटों को 30 मुहूर्त (घटी) में बांटती है। हर घटी का एक विशेष धार्मिक नाम और महत्व है। इसमें सामान्य घड़ी की तरह घंटे, मिनट और सेकेंड की सुइयां भी हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर समय की गणना करती है। इसके अलावा, यह मुहूर्त, पंचांग और मौसम से जुड़ी जानकारी भी प्रदान करती है।

    वैदिक घड़ी क्यों है खास? निर्माता आरोह श्रीवास्तव से बातचीत

    वैदिक घड़ी के निर्माता आरोह श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें यह विचार 2013 में तब आया, जब वे इंग्लैंड के ग्रीनविच म्यूजियम गए थे। वहां उन्होंने महसूस किया कि मौजूदा समय प्रणाली (प्राइम मेरिडियन) दुनिया पर थोपी गई है, जबकि भारत के पास अपनी पारंपरिक, सूर्य-आधारित समय प्रणाली थी।

    सामान्य और वैदिक घड़ी में अंतर

    • सामान्य घड़ी: यह ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) पर आधारित है और रात 12 बजे तिथि बदलती है। यह सिर्फ दो लोगों के बीच मीटिंग तय करने का एक जरिया है, जिसका मूल उद्देश्य मर्चेंट शिप्स के नेविगेशन के लिए था।
    • वैदिक घड़ी: यह सूर्योदय से शुरू होती है। जब इसमें ‘शून्य’ बजता है, तो इसका मतलब है कि आपके शहर में सूर्योदय हो रहा है। यह सिर्फ समय ही नहीं बताती, बल्कि पंचांग, ग्रह-नक्षत्रों, और खगोलीय स्थितियों को भी दर्शाती है। उदाहरण के लिए, “शुक्ल पक्ष तृतीया, तीसरा मुहूर्त” कहने से आप यह जान पाते हैं कि सूर्य किस खगोलीय स्थिति में है।

    आरोह श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग और नॉटिकल साइंस की पढ़ाई के दौरान जाना कि सूर्योदय को एक ‘त्रुटि’ माना जाता है। उन्होंने इस धारणा को चुनौती दी और एक ऐसी घड़ी पर काम शुरू किया जो सूर्य की चाल पर आधारित हो, जैसा कि हमारे ऋषि-मुनि हजारों साल पहले करते थे। यह घड़ी उसी प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ती है।

    IST और GMT क्या हैं?

    • GMT (ग्रीनविच मीन टाइम): यह एक मानक समय प्रणाली है, जिसे 1884 में मान्यता दी गई थी। यह दुनिया के समय का आकलन करने का आधार है, जिसका केंद्र इंग्लैंड का ग्रीनविच गांव है।
    • IST (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम): ब्रिटिश शासन में भारत के दो टाइम जोन थे (कोलकाता और मुंबई)। बाद में IST बना, जो पूरे देश का एक ही मानक समय है। हमारा IST, GMT से 5.30 घंटे आगे है।

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