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एमपी मौसम: मप्र के 45 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, भोपाल में भारी तबाही, जानें मानसून कब आएगा

एमपी मौसम: मप्र के 45 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, भोपाल में भारी तबाही, जानें मानसून कब आएगा
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भोपाल:
BDC NEWS | BHOPALONLINE.ORG

केरल में मानसून की आधिकारिक एंट्री होते ही मध्य प्रदेश के मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भले ही राज्य में मुख्य मानसून के पहुंचने में अभी वक्त हो, लेकिन प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियों ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले दो दिनों से मध्य प्रदेश के एक बड़े हिस्से में तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि (ओले गिरना) का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD) ने 5 जून को अत्यंत संवेदनशील स्थिति को देखते हुए राज्य के 45 जिलों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। राजधानी भोपाल सहित कई प्रमुख शहरों में इस मानसूनी हलचल से चिलचिलाती गर्मी और उमस से तो भारी राहत मिली है, लेकिन अंधड़ के कारण पेड़ गिरने और बिजली गुल होने जैसी घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अगले 4 दिनों तक आंधी, बिजली और बारिश का यह दौर लगातार जारी रहने की संभावना है।

भोपाल में 70 किमी की रफ्तार से आया तूफान

गुरुवार शाम को राजधानी भोपाल में प्रकृति का भीषण रूप देखने को मिला। शहर में अचानक करीब 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली चक्रवाती हवाओं और अंधड़ ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। तेज आंधी के कारण राजधानी के अलग-अलग इलाकों में लगभग 80 से अधिक विशालकाय पेड़ और उनकी भारी टहनियां उखड़कर सड़कों पर आ गिरीं। इसके चलते शहर के मुख्य मार्गों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और घंटों तक बिजली सप्लाई ठप रही।

केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि मालवा-निमाड़ और मध्य भारत के शाजापुर, सीहोर, इछावर और शुजालपुर जैसे क्षेत्रों में भी देर शाम तेज हवाओं के साथ भारी बारिश दर्ज की गई। कुछ स्थानों पर चने के आकार के ओले भी गिरे। मौसम विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में उत्तर पाकिस्तान के ऊपर एक बेहद शक्तिशाली ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) सक्रिय है। इसके साथ ही, मध्य उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के वायुमंडल में एक ‘चक्रवाती परिसंचरण तंत्र’ (Cyclonic Circulation) बना हुआ है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से अरब सागर से लगातार भारी नमी आ रही है, जिसके कारण अगले चार दिनों तक मध्य प्रदेश में मौसम का यही कड़ा रुख बना रहेगा और दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट आएगी।

इन जिलों में ‘ऑरेंज अलर्ट’: 60 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

मौसम केंद्र ने प्रदेश के कुछ हिस्सों में अत्यधिक तेज गति से हवाएं चलने और नुकसान की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं:

  • अंधड़ प्रभावित मुख्य जिले: नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, सागर और दमोह।
  • चेतावनी: इन क्षेत्रों में 60 किलोमीटर प्रतिघंटा या उससे अधिक की रफ्तार से धूलभरी आंधी चलने और वज्रपात (बिजली गिरने) का खतरा है।

45 जिलों में बारिश और वज्रपात का ‘येलो अलर्ट’

मध्य प्रदेश के लगभग 85% हिस्से में प्री-मानसून एक्टिविटी का असर दिख रहा है। मौसम विभाग ने निम्नलिखित जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने का अनुमान जताया है:

  • मध्य और भोपाल संभाग: रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा और राजधानी भोपाल।
  • मालवा-निमाड़ अंचल: धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, देवास और रतलाम।
  • नर्मदापुरम और महाकौशल: नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला और पांढुर्णा।
  • ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड-विंध्य: ग्वालियर, गुना, दतिया, मुरैना, भिंड, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी।

मप्र में कब आएगा मुख्य मानसून? क्यों हो रही है देरी?

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, केरल के तट पर मानसून ने 4 जून को अपनी दस्तक दे दी है। सामान्य तौर पर मानसून 15 जून के आसपास खंडवा या बुरहानपुर के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश करता है। हालांकि, इस साल बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने सिस्टम के कारण मुख्य मानसूनी हवाओं की रफ्तार थोड़ी धीमी है, जिससे मध्य प्रदेश में इसकी एंट्री 5 से 7 दिन की देरी से होने की संभावना है। नए पूर्वानुमान के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून की पहली आधिकारिक दस्तक 20 से 22 जून के बीच हो सकती है। तब तक प्रदेशवासियों को इसी तरह की प्री-मानसून बारिश से काम चलाना होगा।

भोपाल के मौसम का हाल: अगले 4 दिन कैसा रहेगा मिजाज?

राजधानी भोपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में अगले चार दिनों तक आंशिक रूप से लेकर पूरी तरह बादल छाए रहेंगे। दिन के समय उमस बढ़ सकती है, लेकिन दोपहर बाद या शाम को रुक-रुक कर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी रहेगा। तापमान की बात करें तो गुरुवार को भोपाल का अधिकतम तापमान सामान्य से 2 डिग्री कम यानी 38.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस रहा। आने वाले दिनों में पारा 36 डिग्री तक गिर सकता है, जिससे रातें और ठंडी होंगी।


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