सरकार से पूछे तीखे सवाल, जगह-जगह हल्ला बोल
भोपाल।
BDC News | bhopalonline.org
राजधानी भोपाल में इन दिनों आबकारी नीति और नियमों को ताक पर रखकर चल रहीं शराब दुकानों के खिलाफ भारी आक्रोश है। अरेरा कॉलोनी से लेकर शाहपुरा तक, सड़कों पर उतरे लोग अब केवल प्रार्थना नहीं बल्कि प्रशासन से सीधे जवाब मांग रहे हैं। क्या रिहायशी इलाकों की शांति और बच्चों का भविष्य शराब के राजस्व से कम कीमती है
नियमों की धज्जियां: मंदिर और स्कूल के पास कैसे खुले ठेके?
शाहपुरा और अरेरा कॉलोनी में विरोध का मुख्य कारण नियमों की अनदेखी है।
- शाहपुरा: यहाँ एक निजी स्कूल से महज 50 मीटर की दूरी पर शराब दुकान संचालित हो रही है। अभिभावकों का सवाल है कि क्या शिक्षा के मंदिर के पास शराब का शोर जायज है?
- अरेरा कॉलोनी: यहाँ आर्य समाज मंदिर से मात्र 40 मीटर की दूरी पर दुकान स्थित है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में इस मंदिर को ‘मंदिर’ मानने से ही इनकार कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
आवासीय क्षेत्र में कमर्शियल उपयोग: कानून का उल्लंघन
कांग्रेस नेता विवेक त्रिपाठी और क्षेत्रीय पार्षद शिखा गोहिल सहित रहवासियों ने प्रशासन को घेरा है। उनका आरोप है कि आवासीय भूखंडों पर शराब दुकान चलाना मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 और नगर निगम अधिनियम 1956 का सीधा उल्लंघन है। लोगों का कहना है कि जब नक्शा आवासीय उपयोग का है, तो कमर्शियल गतिविधि की अनुमति किसने दी?
सुरक्षा पर सवाल: महिलाओं और बच्चों का निकलना दूभर
विरोध कर रहे नागरिकों का कहना है कि शराब दुकानों के कारण असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ने लगा है। शोर-शराबे और वाहनों की अवैध पार्किंग ने क्षेत्र का सामाजिक वातावरण बिगाड़ दिया है। महिलाओं ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दुकानें शिफ्ट नहीं की गईं, तो उग्र आंदोलन और ‘तालाबंदी’ की जाएगी।
मानवाधिकार आयोग की अनदेखी?
अरेरा कॉलोनी की शिकायत पिछले एक साल से लंबित है। यहाँ तक कि मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने भी मौका मुआयना किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना शासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
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