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डायबिटीज : कही आपके जीवन में खामोश हत्यारे ने तो दस्तक नहीं दे दी है..

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गिरीश कुमार
BDC News | bhopalonline.org

मधुमेह (डायबिटीज) एक ऐसी स्थिति है जिसे अक्सर ‘खामोश हत्यारा’ (Silent Killer) कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआत में बहुत सामान्य लगते हैं। हम आपको बता रहे हैं मधुमेह की पहचान और उसके लक्षण


शरीर में बढ़ते शुगर लेवल को समझने के प्रारंभिक संकेत

मधुमेह की पहचान करने का सबसे पहला कदम अपने शरीर में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों को गौर से देखना है। यदि आपको अचानक से बहुत अधिक प्यास लगने लगी है (पॉलीडिप्सिया) और इसके साथ ही बार-बार पेशाब आने की समस्या (पॉलीुरिया) हो रही है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका शरीर खून में मौजूद अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा, पर्याप्त नींद लेने के बाद भी यदि आप दिन भर अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, तो यह ग्लूकोज के ऊर्जा में सही ढंग से न बदल पाने का परिणाम हो सकता है। दृष्टि में धुंधलापन आना, बार-बार त्वचा या मसूड़ों में संक्रमण होना और किसी भी चोट या घाव का बहुत धीमी गति से भरना मधुमेह के क्लासिक लक्षण माने जाते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है।

खान-पान की आदतों और वजन में अचानक बदलाव

मधुमेह होने पर अक्सर व्यक्ति की भूख में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जाती है, जिसे ‘पॉलीफेगिया’ कहते हैं। इसमें मरीज को खाना खाने के तुरंत बाद भी भूख का एहसास होता रहता है क्योंकि कोशिकाएं ऊर्जा के लिए तरस रही होती हैं। दिलचस्प बात यह है कि अधिक खाने के बावजूद कई मामलों में व्यक्ति का वजन अचानक कम होने लगता है; ऐसा तब होता है जब शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए मांसपेशियों और फैट को जलाने लगता है। इसके विपरीत, टाइप-2 डायबिटीज में कुछ लोगों का वजन तेजी से बढ़ भी सकता है। इसके साथ ही हाथों और पैरों में झुनझुनी होना या सुन्नपन महसूस होना इस बात का संकेत है कि लंबे समय से बढ़ा हुआ शुगर लेवल अब आपकी नसों (नर्व्स) को प्रभावित कर रहा है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी की शुरुआत माना जा सकता है।

चिकित्सकीय परीक्षण और निदान का महत्व

केवल लक्षणों के आधार पर मधुमेह की पुष्टि नहीं की जा सकती, इसके लिए वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य हैं। यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से दो या तीन का अनुभव हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर ‘फास्टिंग ब्लड शुगर’ (खाली पेट) और ‘पीपी ब्लड शुगर’ (खाने के बाद) की जांच करानी चाहिए। इसके अलावा ‘HbA1c’ टेस्ट पिछले तीन महीनों के औसत शुगर लेवल की सटीक जानकारी देता है, जो निदान में सबसे विश्वसनीय माना जाता है। समय रहते पहचान होने से न केवल आप जटिलताओं जैसे कि किडनी की बीमारी या हृदय रोग से बच सकते हैं, बल्कि सही जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के माध्यम से मधुमेह को प्रभावी ढंग से प्रबंधित या कुछ मामलों में रिवर्स भी कर सकते हैं।


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