तेहरान/वॉशिंगटन। BDC News|bhopalonline.org
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध के 24वें दिन वैश्विक तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने अब दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति धमनी, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), को पूरी तरह ठप करने का कार्ड खेल दिया है। ईरान की ‘नेशनल डिफेंस काउंसिल’ ने सोमवार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उसके तटीय क्षेत्रों या द्वीपों (Islands) पर कोई हमला हुआ, तो वे फारस की खाड़ी के समुद्री रास्तों पर घातक बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछा देंगे।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अब इस अंतरराष्ट्रीय मार्ग से गुजरने के लिए देशों को ईरान के साथ सीधे संवाद और सौदेबाजी करनी होगी। बता दें कि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
ट्रंप की ’48 घंटे’ की डेडलाइन और युद्ध का खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो दिन पहले ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि यदि हॉर्मुज रूट को व्यापार के लिए नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के प्रमुख पावर प्लांट्स को निशाना बनाकर बड़ा सैन्य हमला करेगा। ट्रंप द्वारा दी गई इस 48 घंटे की समय सीमा (Deadline) आज रात खत्म हो रही है, जिससे इस क्षेत्र में पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका गहरा गई है।
सीजफायर के लिए ईरान की 3 नई और कड़ी शर्तें
लेबनानी मीडिया ‘अल मयादीन’ के अनुसार, ईरान ने संघर्ष विराम (Ceasefire) के लिए अपनी मांगों की सूची को और कड़ा कर दिया है। अब ईरान ने वार्ता की मेज पर तीन नई शर्तें रखी हैं:
- अमेरिकी सैन्य ठिकानों की विदाई: मध्य पूर्व (West Asia) के इलाके में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तत्काल बंद किया जाए।
- हॉर्मुज के लिए नए कानून: हॉर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन के लिए नए अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय नियम बनाए जाएं, जिनमें ईरान की भूमिका सर्वोपरि हो।
- मीडिया पर नकेल: ईरान विरोधी मीडिया संस्थानों से जुड़े लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और संबंधित देशों द्वारा उनका प्रत्यर्पण (Extradition) सुनिश्चित हो।
इससे पहले ईरान ने युद्ध के नुकसान का हर्जाना और दोबारा हमला न होने की लिखित गारंटी जैसी शर्तें रखी थीं। ईरानी अधिकारियों का साफ कहना है कि जब तक वे अपने दुश्मनों को निर्णायक सबक नहीं सिखा देते, उनकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
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