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नौरोज पर पुतिन का बड़ा बयान: “ईरान का सबसे वफादार दोस्त है रूस”, पश्चिमी देशों को दिया कड़ा संदेश

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वार डेस्क| BDC News| bhopalonline.org

व्लादिमीर पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति और वहां की जनता को नौरोज की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रूस और ईरान के बीच के संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। पुतिन ने अपने संदेश में जोर देकर कहा कि “रूस, ईरान का एक भरोसेमंद और वफादार दोस्त है।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस और ईरान दोनों ही पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं।

रणनीतिक साझेदारी: यूक्रेन से मिडिल ईस्ट तक का साथ

पुतिन का यह संदेश केवल एक सांस्कृतिक शुभकामना नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे राजनीतिक मायने छिपे हैं। पिछले कुछ वर्षों में रूस और ईरान के बीच रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व सहयोग देखा गया है:

  • सैन्य सहयोग: ड्रोन तकनीक और मिसाइल प्रणालियों के आदान-प्रदान ने दोनों देशों की सैन्य ताकत को मजबूती दी है।
  • आर्थिक गलियारा: ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) के माध्यम से दोनों देश डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने और वैकल्पिक व्यापार मार्ग बनाने पर काम कर रहे हैं।
  • साझा दुश्मन: अमेरिका और नाटो (NATO) की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ दोनों देशों ने एक साझा मोर्चा खोल रखा है।

मिडिल ईस्ट में बदलता शक्ति संतुलन

पुतिन के इस बयान को मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में रूस की बढ़ती सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है। डिएगो गार्सिया जैसे रणनीतिक ठिकानों पर ईरान की बढ़ती मारक क्षमता और रूस का उसे मिलता खुला समर्थन, इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस, ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है और हर मुश्किल घड़ी में उसके साथ खड़ा है।

पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ी

क्रेमलिन के इस बयान ने वॉशिंगटन और लंदन में चिंता की लहर पैदा कर दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और ईरान का यह ‘अघोषित गठबंधन’ वैश्विक भू-राजनीति को बदल सकता है। नौरोज के संदेश के जरिए पुतिन ने यह संदेश दे दिया है कि रूस अब पश्चिम की परवाह किए बिना अपने एशियाई और मध्य-पूर्वी सहयोगियों के साथ एक नया वर्ल्ड ऑर्डर (विश्व व्यवस्था) बनाने की दिशा में बढ़ रहा है।

सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती

पुतिन ने यह भी उल्लेख किया कि नौरोज केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह नवीनीकरण और शांति का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाला साल दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और अधिक प्रगाढ़ करेगा।


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